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रणबीर कपूर की 'रामायण': एक जीवन बदलने वाला अनुभव

रणबीर कपूर ने अपनी आगामी फिल्म 'रामायण' को एक जीवन बदलने वाला अनुभव बताया है। उन्होंने इस किरदार के माध्यम से रिश्तों, त्याग और धैर्य का असली अर्थ समझा है। पिता बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता में वृद्धि हुई है। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी के साथ मिलकर, रणबीर ने इस महाकाव्य को पर्दे पर लाने के लिए 5 साल की मेहनत की है। जानें इस फिल्म के पीछे की भावनाएं और रणबीर का नया अवतार।
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रणबीर कपूर की 'रामायण': एक जीवन बदलने वाला अनुभव

रणबीर कपूर का नया अवतार

नई दिल्ली। बॉलीवुड के अभिनेता रणबीर कपूर के लिए फिल्म ‘रामायण’ केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक जीवन परिवर्तक अनुभव बन गई है। उन्होंने साझा किया कि भगवान राम के किरदार को निभाते हुए, वह खुद भी आंतरिक रूप से बदलने लगे हैं। हाल ही में, उन्होंने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें रिश्तों, बलिदान और धैर्य का असली अर्थ समझाया। अपनी बेटी राहा कपूर का उल्लेख करते हुए, रणबीर ने कहा कि पिता बनने के बाद वह और भी जिम्मेदार और संवेदनशील हो गए हैं। उनके इस भावुक बयान ने फैंस की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है, जो अब उनके ‘राम’ अवतार को देखने के लिए बेताब हैं।


निर्देशक नितेश तिवारी के साथ भावनात्मक यात्रा

रणबीर कपूर और निर्देशक नितेश तिवारी अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर गहरी भावनाओं में डूबे हुए हैं। दोनों ने एक प्रमुख फिल्म पत्रिका को दिए इंटरव्यू में फिल्म के पीछे की भावनात्मक और रचनात्मक यात्रा को साझा किया। रणबीर ने स्पष्ट किया कि यह फिल्म उनके लिए केवल करियर की एक बड़ी फिल्म नहीं, बल्कि एक जीवन को परिभाषित करने वाला अनुभव है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें भगवान राम की भूमिका निभाने का प्रस्ताव मिला, तो वह पहले डर गए थे। उन्हें चिंता थी कि क्या वह इस किरदार के साथ न्याय कर पाएंगे।


रामायण का गहरा प्रभाव

रणबीर ने कहा, 'यह फिल्म मेरे जीवन को परिभाषित करने वाली है। इससे मेरी मूल्य प्रणाली में बदलाव आया है। अब मैं जीवन, बलिदान, दया, क्षमा और धर्म को एक नए दृष्टिकोण से देखता हूं।' उन्होंने अपनी बेटी राहा के संदर्भ में कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि राहा ने उन्हें एक बेहतर इंसान बनाया और रामायण ने उन्हें राहा के लिए और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। रणबीर ने भगवान राम को 'मानवीय इंसान' बताया और कहा कि राम की सबसे बड़ी विशेषता उनकी संयम, करुणा और विनम्रता है।


संवेदनशीलता और धैर्य का संदेश

रणबीर ने समझाया, 'राम अहंकार से नहीं, करुणा से प्रतिक्रिया देते हैं। आज की दुनिया में, जहां हम त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तत्पर रहते हैं, राम का विनम्रता और धैर्य से जवाब देना असाधारण लगता है।' निर्देशक नितेश तिवारी ने कहा कि भले ही फिल्म में अत्याधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स का उपयोग किया गया है, लेकिन कहानी की भावनाएं इसके मूल में हैं। उन्होंने बताया कि इस महाकाव्य को पर्दे पर लाने में लगभग 5 साल लगे हैं।