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रणवीर सिंह की संघ प्रमुख से मुलाकात: सिनेमा और राजनीति के बीच नया मोड़

रणवीर सिंह की संघ प्रमुख मोहन भागवत से हालिया मुलाकात ने हिंदी फिल्म उद्योग और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच नए रिश्तों को उजागर किया है। इस मुलाकात के दौरान, रणवीर ने अपनी फिल्म 'धुरंधर-2 द रिवेंज' के बारे में चर्चा की और संघ की गतिविधियों की जानकारी ली। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है, जहां कुछ इसे संघ का प्रचार मान रहे हैं। फिल्म के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। यह घटनाक्रम सिनेमा और राजनीति के बीच के रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।
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रणवीर सिंह की संघ प्रमुख से मुलाकात: सिनेमा और राजनीति के बीच नया मोड़

रणवीर सिंह की नागपुर यात्रा

हाल ही में हिंदी फिल्म उद्योग और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच नए रिश्तों ने चर्चा का विषय बना दिया है। अभिनेता रणवीर सिंह का नागपुर जाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलना केवल एक औपचारिक भेंट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपे हुए हैं। उनकी फिल्म 'धुरंधर-2 द रिवेंज' ने जब दुनिया भर में एक हजार करोड़ से अधिक की कमाई की है, तब यह मुलाकात कई सवालों को जन्म देती है।


मुलाकात का विवरण

नागपुर में रणवीर का लुक पूरी तरह से बदला हुआ था। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए, वह सीधे डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संघ मुख्यालय पहुंचे। इस मुलाकात में, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली, उन्होंने न केवल अपनी फिल्म पर चर्चा की, बल्कि संघ की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली। इसके बाद, उन्होंने रेशिमबाग स्थित डॉक्टर हेडगेवार स्मृति मंदिर जाकर संघ के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार और एमएस गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को लेकर काफी हलचल मची। आलोचकों ने इसे 'धुरंधर 2' को संघ का प्रचार करने का प्रयास बताया। कई लोगों ने इसे धन्यवाद यात्रा तक कह डाला। इस पर सवाल उठने लगे कि क्या यह फिल्म केवल मनोरंजन है या इसके पीछे कोई वैचारिक उद्देश्य भी है?


निर्देशक का बचाव

इन आरोपों के बीच, फिल्म के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने खुलकर विरोधियों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि जो लोग वर्षों से प्रचार आधारित फिल्मों से करियर बना रहे थे, वही अब 'धुरंधर 2' को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच को प्रचार बताना आज का सबसे बड़ा छल है और इस मानसिकता का मुकाबला करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


संघ का सांस्कृतिक जुड़ाव

यह विवाद यहीं खत्म नहीं होता। रणवीर का यह कदम ऐसे समय में आया है जब संघ अपने सौ साल पूरे होने के अवसर पर फिल्म उद्योग के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में सलमान खान ने मुंबई में आयोजित शताब्दी समारोह में भाग लिया, जहां मोहन भागवत ने युवाओं पर फिल्मी सितारों के प्रभाव की बात की। करण जौहर ने भी मोहन भागवत को एक प्रभावशाली वक्ता बताते हुए संवाद की सराहना की।


रणवीर का पूर्व अनुभव

रणवीर सिंह पहले भी सत्ता के शीर्ष से संवाद कर चुके हैं। 2019 में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान कहा था कि फिल्में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि देश को जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं। 2021 में आई उनकी फिल्म तिरासी को भी इसी भावना से जोड़ा गया था। अब 'धुरंधर 2' के साथ उनका संघ से जुड़ाव इस सोच को और मजबूत करता नजर आ रहा है।


विवाद और संभावनाएं

'धुरंधर 2' की अभूतपूर्व सफलता ने रणवीर को शिखर पर पहुंचाया है, लेकिन यह मुलाकात उन्हें विवादों के केंद्र में भी ले आई है। समर्थक इसे संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव का सकारात्मक कदम मानते हैं, जबकि विरोधी इसे खतरनाक संकेत मानते हैं। सोशल मीडिया पर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या हिंदी सिनेमा अब खुलकर वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है?


निष्कर्ष

यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। रणवीर सिंह, उनकी फिल्म और संघ के साथ उनका संबंध आने वाले समय में हिंदी सिनेमा और राजनीति के रिश्तों की नई कहानी लिख सकता है। यह घटनाक्रम केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक बदलते दौर की दस्तक है जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।