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सबा आजाद ने पीरियड्स पर भेदभाव और दकियानूसी सोच पर उठाए सवाल

एक्ट्रेस सबा आजाद ने पीरियड्स को लेकर समाज में फैली दकियानूसी सोच और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि पीरियड्स को शर्म की बात नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए। सबा ने छोटे शहरों में इस विषय पर शिक्षा की कमी और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। जानें उनके विचार और समाज में बदलाव की आवश्यकता के बारे में।
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सबा आजाद ने पीरियड्स पर भेदभाव और दकियानूसी सोच पर उठाए सवाल

सबा आजाद का पीरियड्स पर विचार


एक्ट्रेस सबा आजाद ने पीरियड्स के बारे में समाज में व्याप्त धारणाओं और महिलाओं के प्रति भेदभाव पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने बताया कि पीरियड्स को शर्मनाक नहीं बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए, जिसे सम्मान मिलना चाहिए। सबा ने छोटे शहरों में इस विषय पर फैली दकियानूसी सोच, स्कूलों में शिक्षा की कमी और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर भी सवाल उठाए।


गलट्टा प्लस के साथ बातचीत में सबा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका परिवार काफी प्रगतिशील है, और उनकी मां अक्सर इस तरह के मुद्दों पर उन्हें समझाती हैं। उन्होंने बताया कि पीरियड्स को लेकर लड़कियों में भ्रम होता है कि वे बड़े हो जाएंगी। इसके अलावा, अगर पीरियड्स में कोई समस्या आती है तो उन्हें सही नहीं समझा जाता। उनका स्कूल ऐसा था, लेकिन हर जगह ऐसा नहीं होता।


सबा ने कहा कि छोटे कस्बों में जब किसी लड़की को पीरियड्स आते हैं, तो उसे बीमार समझा जाता है, जबकि इसे जश्न मनाने का अवसर होना चाहिए। क्योंकि पीरियड्स के बिना बच्चे नहीं होंगे, इसलिए महिलाओं के शरीर का सम्मान होना चाहिए। यह जीवन की एक चक्र है, जिससे नई जिंदगी का आरंभ होता है।


उन्होंने यह भी कहा कि पीरियड्स को लेकर महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। कई अंधविश्वास हैं, जैसे कि रसोई में मत जाओ, यह गंदा है, आदि। सबा ने कहा कि हम 2026 में हैं, और अब इन सब चीजों का अंत होना चाहिए। विज्ञान ने बहुत प्रगति की है, और हमें इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए।


सबा ने यह भी बताया कि शिक्षक बच्चों को इस विषय पर सिखाना नहीं चाहते और फिर उन्हें दोषी ठहराते हैं। बच्चों में सीखने की क्षमता होती है, लेकिन बड़े उन्हें सिखाने में असफल रहते हैं। जब ऐसे विषय आते हैं, तो अध्यापक पाठ बदल देते हैं। यह शर्म की बात है कि बायोलॉजी के शिक्षक इस विषय को छोड़ देते हैं, जबकि यह एक बुनियादी ज्ञान है।