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सलमान खान ने जेराई फिटनेस के खिलाफ दिवाला याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने जेराई फिटनेस के खिलाफ दिवाला याचिका खारिज करने के आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी है। यह मामला उनके फिटनेस उपकरण ब्रांड 'बीइंग स्ट्रॉन्ग' से जुड़ा है, जिसमें रॉयल्टी भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। जानें इस कानूनी लड़ाई के पीछे की पूरी कहानी और सलमान की अपील की प्रक्रिया के बारे में।
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सलमान खान ने जेराई फिटनेस के खिलाफ दिवाला याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी

सलमान खान की अपील

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सलमान खान ने एनसीएलटी द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जेराई फिटनेस के खिलाफ 7.24 करोड़ रुपये की बकाया राशि के लिए दिवालियेपन की कार्यवाही शुरू करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। यह मामला सलमान द्वारा जेराई फिटनेस के सहयोग से स्थापित फिटनेस उपकरण ब्रांड 'बीइंग स्ट्रॉन्ग' से संबंधित है।


समझौते का विवाद

सलमान ने अपने फिटनेस उपकरण ब्रांड 'बीइंग स्ट्रॉन्ग' के लाइसेंस अधिकारों को लेकर जेराई फिटनेस के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत रॉयल्टी भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।


उन्होंने मई में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ में जेराई फिटनेस के खिलाफ दिवाला याचिका दायर की थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। न्यायालय ने कहा कि यह मामला विवादास्पद है और दिवाला कानून के बजाय वसूली प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।


अपील की प्रक्रिया

एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ सलमान ने अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील की है। इस मामले की सुनवाई 22 अगस्त को निर्धारित की गई थी, लेकिन उनके वकील के अनुरोध पर इसे 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।


सलमान ने अक्टूबर 2018 में जेराई फिटनेस के साथ एक व्यापार लाइसेंस समझौता किया था, जिसमें 'बीइंग स्ट्रॉन्ग' ब्रांड का उपयोग करने का अधिकार दिया गया था।


रॉयल्टी भुगतान में देरी

कोविड-19 महामारी और व्यापार में रुकावट के कारण रॉयल्टी भुगतान में संशोधन किया गया था। हालांकि, सलमान का कहना है कि जेराई फिटनेस ने समय पर रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया। उन्होंने पिछले साल सितंबर में 7.24 करोड़ रुपये की मांग के साथ नोटिस भेजा था, जिसमें 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी शामिल था।


जेराई फिटनेस का कहना है कि उनके बीच पहले से ही विवाद था और उन्होंने एक्स-टेंड और प्रोटॉन सीरीज जैसे उत्पादों के लिए बड़ी पूंजी निवेश की थी। एनसीएलटी ने यह भी माना कि लाइसेंस प्राप्त इकाई को उत्पाद बेचने और प्रचार की अनुमति थी, लेकिन इसके लिए पूर्व-अनुमति लेना आवश्यक था।