सौरभ द्विवेदी का इस्तीफा: क्या वह अभिनय में कदम रखेंगे?
सौरभ द्विवेदी का इस्तीफा
मुंबई: लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक सौरभ द्विवेदी ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। बारह वर्षों तक इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े रहने के बाद उनका यह कदम मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है। यह खबर पांच जनवरी 2026 को सामने आई, जिसके बाद सोशल मीडिया और पत्रकारिता में कई चर्चाएं शुरू हो गईं।
सौरभ द्विवेदी का भविष्य
इस्तीफे के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि सौरभ अब क्या करेंगे। कुछ ने इसे उनके हालिया शो से जोड़ा, जबकि अन्य का मानना है कि वह नए क्षेत्रों में खुद को आजमाना चाहते हैं। इसी बीच, द वायरल फीवर (TVF) की नई वेब सीरीज का टीजर जारी हुआ, जिसमें सौरभ की झलक दिखाई दी। यह झलक चर्चा का मुख्य कारण बन गई है।
क्या सौरभ अभिनय में कदम रखेंगे?
क्या वाकई एक्टिंग में कदम रखेंगे सौरभ
टीज़र के आने के बाद यह सवाल और भी प्रबल हो गया है कि क्या सौरभ अब अभिनय की दुनिया में कदम रखेंगे। यह सीरीज़, जिसका नाम स्पेस जेन चंद्रयान है, भारतीय अंतरिक्ष मिशन पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है। इसे TVF और JioHotstar का पहला बड़ा सहयोग माना जा रहा है। सीरीज़ का प्रीमियर 23 जनवरी 2026 को होगा और इसमें कुल पांच एपिसोड होंगे।
इस सीरीज में नकुल मेहता, प्रकाश बेलावाड़ी, श्रिया सरन, दानिश सैत और गोपाल दत्त जैसे कलाकार शामिल होंगे। सौरभ की झलक ने दर्शकों का ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी किरदार में नजर आएंगे या यह केवल पुराने फुटेज का हिस्सा है। फिर भी, समय और परिस्थितियों को देखते हुए अटकलें तेज हो गई हैं।
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता यात्रा
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता यात्रा
आज सौरभ द्विवेदी को लोग कैमरे के सामने बेबाक सवाल पूछते देखते हैं, लेकिन कभी वह कैमरे से झिझकते थे। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के दौरान उनके शिक्षकों ने उनकी लेखन क्षमता को पहचाना और उन्हें पत्रकारिता की दिशा में प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने आजतक डॉट इन से अपने करियर की शुरुआत की और फीचर्स एडिटर के रूप में पहचान बनाई।
इंडिया टुडे ग्रुप के साथ उनका सफर आगे बढ़ा और इसी दौरान उन्होंने लल्लनटॉप की स्थापना की। लल्लनटॉप ने हिंदी डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा दी और कम समय में युवाओं के बीच खास पहचान बना ली। बारह वर्षों तक टीम का नेतृत्व करने के बाद उनका इस्तीफा एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
