हरियाणा को मिला 'जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड', डिजिटल कृषि में की गई है बड़ी उपलब्धि
हरियाणा की डिजिटल गवर्नेंस में नई ऊँचाइयाँ
चंडीगढ़, 16 मई। हरियाणा ने डिजिटल गवर्नेंस और कृषि में आधुनिक तकनीक का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम में आयोजित 'जियोस्पेशियल वर्ल्ड फोरम 2026' के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हरियाणा को 'जियोस्पेशियल एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार राज्य को 'अंतरिक्ष से नागरिक सेवा' की अनूठी अवधारणा पर कार्य करने के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (HARSAC) की टीम को बधाई दी और इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया।
'अंतरिक्ष से नागरिक सेवा' का एकीकृत प्लेटफॉर्म
हरसैक के निदेशक डॉ. सुल्तान सिंह ने इस वैश्विक उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण हरियाणा आज डिजिटल कृषि में अग्रणी बन चुका है। हरसैक ने अंतरिक्ष तकनीक और रिमोट सेंसिंग डेटा का उपयोग करके एक 'यूनिफाइड जियो इनेबल्ड प्रणाली' विकसित की है। यह प्रणाली बिना जमीन पर जाए खेतों और संसाधनों की सटीक जानकारी प्रदान करती है। वर्तमान में, इस प्रणाली से 4,000 से अधिक सक्रिय दैनिक उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं, जिनमें नीति निर्धारक, राजस्व अधिकारी और युवा नवाचारकर्ता शामिल हैं।
1 करोड़ खेतों पर उपग्रह की निगरानी
यह उन्नत जियोस्पेशियल प्लेटफॉर्म ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए एक गेमचेंजर साबित हो रहा है। इसके माध्यम से हर फसल सीजन में हरियाणा के 15 लाख से अधिक किसानों को वैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा रही है और प्रदेश के 1 करोड़ से अधिक खेतों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। इस तकनीक से फसल की सेहत, उत्पादन का सटीक आकलन, जल संसाधन प्रबंधन, फसल बीमा दावों का विश्लेषण, मंडी मानचित्रण और फसल अवशेष प्रबंधन की सटीक निगरानी की जा रही है। इससे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाया गया है और व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी हो गई है।
एआई और ड्रोन तकनीक से हो रही है डिजिटल मैपिंग
डॉ. सुल्तान सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जूरी ने खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूलन क्षमता के क्षेत्र में हरियाणा के इस कार्य मॉडल की सराहना की है। हरसैक अब केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि उपग्रह चित्रों, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), मोबाइल ऐप, ड्रोन सर्वे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहा है। इसके जरिए राज्य के जल स्रोतों, सड़कों के नेटवर्क, पंचायत की संपत्तियों और भूमि उपयोग में हो रहे परिवर्तनों की व्यापक मैपिंग की जा रही है, जिससे विकास कार्यों को वैज्ञानिक दिशा मिल रही है।
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