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ऋषि पंचमी 2025: महत्व और पूजा विधि

ऋषि पंचमी 2025 का पर्व भारतीय संस्कृति में ऋषियों के महत्व को दर्शाता है। इस दिन विशेष पूजा विधियों का पालन किया जाता है, जिसमें सप्तऋषियों की पूजा और देवी अरुंधती की आराधना शामिल है। जानें इस पर्व का सही समय, व्रत के नियम और पूजा की विधि।
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ऋषि पंचमी 2025: महत्व और पूजा विधि

ऋषि पंचमी का महत्व

ऋषि पंचमी 2025: भारतीय संस्कृति में ऋषियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कठोर तपस्या के माध्यम से ज्ञान अर्जित किया और वेदों तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों की रचना की, जिससे समाज को धर्म, सत्य और न्याय का मार्गदर्शन मिला। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत मनाया जाता है। इस दिन का संबंध आकाश में स्थित सात तारों से भी है। ऋषियों की पूजा को बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है, विशेष रूप से सप्तऋषियों - गौतम, भारद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप और अत्रि की पूजा की जाती है।


ऋषि पंचमी की पूजा का समय

पंचांग के अनुसार, आज ऋषि पंचमी की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रात: 11:05 बजे से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। इस प्रकार, महिलाओं को इस पूजा के लिए लगभग ढाई घंटे का समय मिलेगा।


विशेष पूजा विधि

ऋषि पंचमी के दिन देवी अरुंधती की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यदि कोई बहन रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी नहीं बांध पाई है, तो वह इस दिन अपने भाई को रक्षासूत्र बांधकर उसकी सुख-समृद्धि की कामना करती है।


व्रत के नियम

ऋषि पंचमी के दिन अन्न और नमक का सेवन नहीं किया जाता है। व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन दही और समा के चावल का सेवन करती हैं। इसके अलावा, हल से जोते गए अनाज का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। व्रत समाप्त होने पर, सप्तऋषियों को अर्पित किए गए फल, मिठाई और धन को मंदिर में किसी पुजारी को दान देकर आशीर्वाद लेना चाहिए।