Newzfatafatlogo

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस वर्ष, 5 मई को अंगारकी चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें इस दिन की सही तिथि, चंद्रोदय का समय और पूजा विधि। इस व्रत का विशेष महत्व संकटों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ा है। गणेश जी की पूजा से जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं।
 | 
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

भगवान गणेश की कृपा के लिए महत्वपूर्ण व्रत


हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सबसे पहले पूजा जाने वाला देवता माना जाता है। हर शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को एकदंत संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि विशेष महत्व रखती है क्योंकि इस दिन अंगारकी चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं इस व्रत की सही तिथि, चंद्रोदय का समय और इसका महत्व।


एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 5:24 बजे से शुरू होकर 6 मई 2026 को सुबह 7:51 बजे समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय विद्यमान रहेगी, इसलिए व्रत 5 मई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।


अंगारकी चतुर्थी का महासंयोग

इस वर्ष एकदंत संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को आती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन का फल अन्य चतुर्थियों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में मंगल दोष है, उन्हें इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इससे मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन शिव योग का निर्माण भी हो रहा है, जो साधना और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।


एकदंत संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि


  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति जी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से अभिषेक करें।

  • गणेश जी को अक्षत, फूल, धूप, दीप और उनका प्रिय दूर्वा अर्पित करें। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं।

  • गणपति को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।

  • ओम गणपतये नम: मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें।

  • रात को चंद्रमा निकलने के बाद उन्हें अर्घ्य दें और पूजा करने के बाद ही व्रत खोलें।


संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में भगवान गणेश जी को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसका विशेष महत्व संकटों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ा है। संकष्टी का अर्थ ही है संकटों को हरने वाला।


इस दिन व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन के दुख, बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है। इस दिन उनकी विशेष पूजा करने से कार्यों में आने वाली रुकावटें समाप्त होती हैं।