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गणेश चतुर्थी पर मूर्ति की सूंड की दिशा का महत्व: जानें कौन सी है आपके लिए शुभ

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना का महत्व है। इस लेख में हम जानेंगे कि मूर्ति की सूंड की दिशा कैसे आपके जीवन में शुभ-अशुभ परिणाम ला सकती है। बाईं, दाईं और सीधी सूंड वाली गणेश प्रतिमाओं के लाभ और स्थापित करने के नियमों पर चर्चा की गई है। सही दिशा में मूर्ति स्थापित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। जानें कौन सी मूर्ति आपके लिए सबसे उपयुक्त है और इसके पीछे का धार्मिक महत्व क्या है।
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गणेश चतुर्थी पर मूर्ति की सूंड की दिशा का महत्व: जानें कौन सी है आपके लिए शुभ

गणेश चतुर्थी: आस्था और उत्सव का प्रतीक

गणेश चतुर्थी: इस पर्व पर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना हर भक्त के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणपति बप्पा की सूंड की दिशा न केवल उनकी आकृति को दर्शाती है, बल्कि आपके जीवन में आने वाले शुभ और अशुभ परिणामों को भी प्रभावित कर सकती है? वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, मूर्ति की सूंड किस दिशा में है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप गणेश चतुर्थी पर अपने घर, ऑफिस या दुकान में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं, तो सूंड की दिशा के आधार पर यह जानना आवश्यक है कि कौन-सी मूर्ति आपके लिए सबसे उपयुक्त होगी।


बाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा

सबसे शुभ और सरल मानी जाती है


वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली गणेश प्रतिमा को वाममुखी गणेश कहा जाता है, जो घर के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है.


महत्व: यह प्रतिमा सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक होती है.


लाभ: इससे घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.


  • पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं.

  • आर्थिक समृद्धि बढ़ती है.


स्थापित करने का नियम


इस प्रकार की प्रतिमा को घर में कहीं भी स्थापित किया जा सकता है, इसके लिए विशेष नियमों का पालन आवश्यक नहीं है, जिससे यह गृहस्थ जीवन के लिए आदर्श मानी जाती है.


दाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा

दक्षिणमुखी गणेश


दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली गणेश प्रतिमा को दक्षिणमुखी गणेश कहा जाता है। यह मूर्ति शक्ति और सिद्धि की प्रतीक मानी जाती है, लेकिन इनकी पूजा में विशेष सावधानी बरतनी होती है.


महत्व: यह प्रतिमा हठ और दृढ़ निश्चय का संकेत देती है, और भक्त को मोक्ष की दिशा में अग्रसर करती है.


लाभ: यदि विधिपूर्वक पूजा की जाए तो यह धन और वैभव का द्वार खोल सकती है.


स्थापित करने का नियम


इस प्रतिमा को घर में रखने से पहले किसी अनुभवी पंडित या वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि पूजा में किसी भी प्रकार की चूक से इसके विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं.


सीधी सूंड वाली गणेश प्रतिमा

आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक


  • भगवान गणेश की सीधी सूंड वाली प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ होती है, लेकिन यह व्यक्ति के जीवन में संतुलन, ध्यान और मानसिक स्पष्टता लाने में सहायक मानी जाती है.


महत्व: इसे सुषुम्णा गणेश कहा जाता है, जो ध्यान, योग और साधना करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है.


लाभ: इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है, साधना में सफलता मिलती है, और आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़ने में सहायता मिलती है.


स्थापित करने का नियम


इस प्रकार की मूर्ति की स्थापना भी किसी जानकार पंडित की सलाह से ही करनी चाहिए, ताकि इसके पूर्ण लाभ प्राप्त किए जा सकें.


गणेश जी की मूर्ति की सूंड की दिशा का महत्व

गणेश जी की मूर्ति की सूंड की दिशा न केवल उनकी आकृति का एक पहलू है, बल्कि यह उनके स्वरूप, शक्तियों और भक्तों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी दर्शाती है। यदि आप इस गणेश चतुर्थी अपने घर या कार्यस्थल पर बप्पा की मूर्ति स्थापित कर रहे हैं, तो सूंड की दिशा के अनुसार विचार कर ही मूर्ति का चयन करें.


Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.