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चैत्र अमावस्या: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चैत्र अमावस्या, जो हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को आती है, का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों का तर्पण और स्नान-दान करने की परंपरा है। जानें इस साल की चैत्र अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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चैत्र अमावस्या: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चैत्र अमावस्या का महत्व


जानें डेट शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
चैत्र अमावस्या, नई दिल्ली: हिंदी पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि अमावस्या कहलाती है। पूरे वर्ष में 12 बार अमावस्या आती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। स्नान-दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को चैत्र अमावस्या कहा जाता है, जिसे भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है।


चैत्र अमावस्या की तिथि

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या 18 मार्च को सुबह 08:25 बजे प्रारंभ होगी और 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 19 मार्च को चैत्र अमावस्या मनाई जाएगी।


चैत्र अमावस्या स्नान-दान मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त 05:08 बजे शुरू होगा और 05:56 बजे तक रहेगा। प्रात: संध्या मुहूर्त 05:32 बजे से 06:44 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त 12:22 बजे से 01:11 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त 02:47 बजे से 03:36 बजे तक रहेगा।


चैत्र अमावस्या की पूजा विधि

चैत्र अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इस दिन भगवान विष्णु पीपल के पेड़ में निवास करते हैं, इसलिए पीपल की जड़ में जल चढ़ाएं। शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें। अंत में जरूरतमंद को दान दें।


चैत्र अमावस्या का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, चैत्र अमावस्या के दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली आती है।