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चैत्र नवरात्रि: कलश स्थापना का शुभ अवसर

चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसमें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 बजे से है। इस बार नवरात्रि खरमास और पंचक के बीच मनाई जाएगी। जानें कलश स्थापना की विधि और इसके महत्व के बारे में।
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चैत्र नवरात्रि: कलश स्थापना का शुभ अवसर

नवरात्रि का शुभारंभ


चैत्र नवरात्रि का पर्व कल, 19 मार्च से आरंभ होने जा रहा है। इस अवसर पर पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। नवरात्रि का समापन 27 मार्च को महानवमी के साथ होगा। इस बार नवरात्रि का आरंभ एक विशेष संयोग में हो रहा है, क्योंकि इस समय खरमास और पंचक दोनों ही चल रहे हैं। खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा, जबकि पंचक 16 मार्च से 20 मार्च तक प्रभावी रहेगा।


चैत्र नवरात्रि की तिथि

नवरात्रि का पहला दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर होता है। इस वर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे से शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 04:25 बजे तक रहेगी। इसलिए, उदया तिथि के अनुसार कलश स्थापना कल की जाएगी।


कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 बजे से शुरू होगा और यह सुबह 07:43 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। यदि सुबह कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो इस समय का उपयोग करें।


खरमास और पंचक में कलश स्थापना

ज्योतिषियों के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन देवी की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्यों के लिए कोई रोक नहीं है। इसलिए, आप निश्चिंत होकर तय मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापना के बाद माता दुर्गा का आह्वान किया जाता है और पूजा आरंभ होती है।


कलश स्थापना की विधि


  • ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापित करें।

  • चैत्र नवरात्रि के पहले दिन स्नान करें।

  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें।

  • मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोएं।

  • एक मिट्टी या तांबे का कलश लें, उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।

  • कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांधें और ऊपर एक नारियल रखें।

  • इस कलश को देवी की चौकी के पास स्थापित करें।