Newzfatafatlogo

पशुपतिनाथ मंदिर: भगवान शिव का अद्भुत स्थल और इसकी पौराणिक कहानियाँ

पशुपतिनाथ मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है, नेपाल में बागमती नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर का महत्व केदारनाथ से जुड़ा हुआ है, जहाँ भगवान शिव ने पांडवों की खोज में भैंसे का रूप धारण किया था। इस लेख में हम जानेंगे कि इस मंदिर को पशुपतिनाथ क्यों कहा जाता है और इसके पीछे की पौराणिक कहानियाँ क्या हैं। जानें कैसे भगवान शिव ने राक्षसों का संहार कर सभी जीवों के रक्षक के रूप में प्रकट हुए।
 | 
पशुपतिनाथ मंदिर: भगवान शिव का अद्भुत स्थल और इसकी पौराणिक कहानियाँ

पशुपतिनाथ मंदिर का महत्व

नेपाल में बागमती नदी के किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के दर्शन के बिना केदारनाथ की यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहाँ पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि इस मंदिर को पशुपतिनाथ क्यों कहा जाता है।


केदारनाथ से संबंध

महाभारत में वर्णित एक कथा के अनुसार, पांडवों द्वारा किए गए नरसंहार के कारण भगवान शिव उनसे क्रोधित हो गए थे। पाप मुक्ति के लिए पांडवों ने भगवान शिव की खोज की। भगवान शिव ने केदारनाथ में एक भैंसे का रूप धारण कर लिया और जमीन के अंदर छिप गए। लेकिन भीम ने उन्हें खोज निकाला और पकड़कर बाहर खींचने लगे।


पशुपतिनाथ का नामकरण

कथा के अनुसार, भगवान शिव एक बार हिरण के रूप में हिमालय की गुफा में निवास करने लगे थे। देवी पार्वती और अन्य देवताओं ने उनकी खोज की और पाया कि वे एक पशु के रूप में हैं। सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे अपने वास्तविक रूप में प्रकट हों। महादेव ने इस प्रार्थना को स्वीकार किया और पशुपतिनाथ के रूप में प्रकट हुए।


पशुपतिनाथ की प्रचलित कथा

भगवान शिव के पशुपतिनाथ कहलाने के पीछे एक और कथा है। इस क्षेत्र में राक्षसों ने आतंक मचाया था, जिससे सभी जीव परेशान थे। तब लोगों ने महादेव से सहायता मांगी। भगवान शिव ने सभी राक्षसों का संहार किया और 'सभी जीवों के रक्षक' के रूप में जाने गए। इसलिए इस स्थान पर भगवान शिव को पशुपतिनाथ के नाम से जाना जाता है।