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बसंत पंचमी: मां सरस्वती की पूजा और दीप जलाने के महत्व

बसंत पंचमी का त्योहार माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन विद्या और ज्ञान की देवी की पूजा करने से करियर में सफलता और खुशहाली की प्राप्ति होती है। जानें इस खास दिन पर दीपक जलाने के महत्व और सही स्थान, जिससे मां सरस्वती की कृपा प्राप्त हो सके।
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बसंत पंचमी: मां सरस्वती की पूजा और दीप जलाने के महत्व

बसंत पंचमी का पर्व

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे मां सरस्वती को समर्पित किया गया है। इस वर्ष, बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन विद्या, बुद्धि, कला और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से करियर में सफलता और जीवन में खुशहाली प्राप्त होती है।


दीप जलाने का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बसंत पंचमी की शाम को घर के विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है और करियर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।


इन 5 स्थानों पर जलाएं दीपक

पूजा स्थान: बसंत पंचमी के दिन सबसे पहले दीपक अपने घर के मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने जलाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाकर उसमें एक चुटकी हल्दी डालें। पीला रंग मां सरस्वती को प्रिय है और यह ज्ञान का प्रतीक है। इससे बुद्धि में वृद्धि होती है।


पढ़ाई के स्थान पर: इस दिन अपनी किताबों की अलमारी या स्टडी टेबल के पास दीपक जलाना न भूलें। यह दीपक मन की चंचलता को दूर करके एकाग्रता बढ़ाता है, जिससे करियर में रुकावटें कम होती हैं।


घर के मुख्य द्वार: बसंत पंचमी की शाम को घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाना शुभ होता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश कराता है और जीवन की नकारात्मकता को दूर करता है।


उत्तर-पूर्व दिशा: वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है। करियर में सफलता के लिए इस दिशा में दीपक जलाना चाहिए।


तुलसी का पौधा: तुलसी को लक्ष्मी और ज्ञान का प्रतीक माना गया है। शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।


पूजन मंत्र

- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः।।