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बुद्ध पूर्णिमा: तिथि, महत्व और पूजा विधि

बुद्ध पूर्णिमा, जो हर साल बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है, हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु के 9वें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था, और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी। इस लेख में, हम बुद्ध पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे। जानें कि इस दिन स्नान और दान का क्या महत्व है और कैसे इसे मनाया जाता है।
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बुद्ध पूर्णिमा: तिथि, महत्व और पूजा विधि

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

हर वर्ष बैसाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है, जिसे बैसाख पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह दिन हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु के 9वें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। इसके अलावा, इसी दिन गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने महापरिनिर्वाण भी प्राप्त किया। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। आइए, बुद्ध पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं...


तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष, 30 अप्रैल 2026 की रात 09:13 बजे से बैसाख पूर्णिमा की तिथि शुरू होगी और 01 मई की रात 10:53 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, 01 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।


बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव

गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाएं बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही हुई थीं। भगवान विष्णु के 9वें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। इसी दिन बोध गया में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और कुशीनगर में उन्होंने सांसारिक बंधनों से मुक्ति पाई। इस दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने घरों में पवित्र ग्रंथ त्रिपिटक और धम्मपद का पाठ करते हैं।


बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। बैसाख पूर्णिमा पर सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा तुला राशि में होते हैं। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। दान-पुण्य करने से जातक को पुण्य फल की प्राप्ति होती है। बैसाख पूर्णिमा पर मिट्टी के घड़े का दान गौ दान के समान फल देने वाला माना जाता है। इसके साथ ही, इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।