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मकर संक्रांति: सूर्य देव की पूजा और दान का महत्व जानें

मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जो सूर्य देव को समर्पित है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। जानें इस पर्व पर स्नान का शुभ मुहूर्त, दान के लिए उपयुक्त वस्तुएं और सूर्य देव की पूजा विधि। इस जानकारी के साथ, आप इस पावन पर्व को सही तरीके से मना सकते हैं।
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मकर संक्रांति: सूर्य देव की पूजा और दान का महत्व जानें

मकर संक्रांति का महत्व


मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित है और तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस खगोलीय घटना के कारण, मकर संक्रांति पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है।


स्नान और दान का महत्व

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, और भगवान सूर्य स्वास्थ्य, तेज और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सूर्य देव की पूजा विधि।


मकर संक्रांति पर स्नान का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष के अनुसार, सूर्य देव के गोचर से आठ घंटे पहले और बाद का समय पुण्य काल माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात को हुआ। इसलिए, मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 03:13 बजे से शुरू हुआ और यह आज सुबह तक मान्य है।


स्नान-दान का विशेष समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:27 से 06:21 बजे तक रहेगा। इस समय पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:15 से 8:00 बजे तक रहेगा, जिसमें स्नान और दान करना सर्वोत्तम है। हालांकि, आज दोपहर तीन बजे तक गंगा सहित किसी भी पवित्र नदी में स्नान किया जा सकता है।


दान के लिए उपयुक्त वस्तुएं

मकर संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन चावल से बनी खिचड़ी का दान किया जा सकता है। इसके अलावा, चावल, तिल, गुड़, अन्न, कंबल, वस्त्र और घी का दान करने से उत्तम फल प्राप्त होते हैं।


सूर्य देव की पूजा विधि

इस दिन प्रातः पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। तांबे के लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल और गुड़ डालें। सूर्य देव के मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें, आसन पर बैठकर सूर्य चालीसा का पाठ करें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें, और अंत में विधि-विधान से सूर्य देव की आरती करें।