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रंग पंचमी: हिंदू धर्म में विशेष पर्व का महत्व और पूजा विधि

रंग पंचमी का पर्व हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के होली खेलने की पौराणिक कथा है। जानें इस पर्व की तिथि, पूजा विधि, और मंत्रों के बारे में, जो इस दिन की विशेषता को दर्शाते हैं। रंग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, और यह होली के बाद आता है।
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रंग पंचमी: हिंदू धर्म में विशेष पर्व का महत्व और पूजा विधि

रंग पंचमी का महत्व

हिंदू धर्म में रंग पंचमी का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली का आनंद लिया था। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता भी पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए, इस दिन राधा-कृष्ण की श्रद्धा से पूजा करने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। आइए, रंग पंचमी की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्रों के बारे में विस्तार से जानते हैं...


तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 07 मार्च की शाम 07:17 बजे कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि आरंभ हुई। वहीं, 08 मार्च को रात 09:10 बजे इस तिथि का समापन होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, 08 मार्च 2026 को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व होली के पांच दिन बाद आता है।


पूजन विधि

इस दिन प्रातः जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाएं। इसके बाद चौकी पर राधा रानी और श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करें और उस पर गंगाजल छिड़कें। फिर राधा रानी और श्रीकृष्ण को गुलाल अर्पित करें, विधिपूर्वक पूजा करें और आरती करें। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा का विशेष महत्व है, और घी का दीपक जलाना चाहिए। श्रीकृष्ण और राधा रानी के मंत्रों का जाप करें। शाम को भी विधिपूर्वक पूजा करें और भोग में बताशा, बर्फी और सफेद मिठाई चढ़ाएं।


मंत्र

ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः


ओम श्रीं श्रीये नमः


ओम श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय नमः


ओम ह्रीं श्रीं राधिकायै नमः


ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः


ओम वृषभानुजायै विद्महे, कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात्


महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, रंग पंचमी के दिन राधा रानी और श्रीकृष्ण ने होली खेली थी। सभी देवी-देवता इस अद्भुत होली का आनंद लेने के लिए धरती पर आए थे। यही कारण है कि रंग पंचमी पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। मथुरा-वृंदावन के कुछ मंदिरों में रंग पंचमी पर्व के साथ ही होली का त्योहार समाप्त होता है।