वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व
इस वर्ष वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और सामग्री के बारे में। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पतियों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस दिन विशेष योग भी बन रहे हैं, जो पूजा के लिए लाभकारी हैं।
| May 15, 2026, 19:19 IST
वट सावित्री व्रत का महत्व
इस वर्ष वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का एक विशेष संयोग बन रहा है। यह व्रत 16 मई को मनाया जाएगा। ज्येष्ठ मास में आने वाले सभी व्रतों में वट सावित्री व्रत को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस बार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तक उत्तर भारत में और शुक्ल पक्ष में दक्षिण भारत में मनाया जाएगा। यह व्रत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे कई क्षेत्रों में मनाया जाता है। मान्यता है कि महिलाएं बरगद के पेड़ की उम्र के बराबर अपने पतियों की उम्र की कामना करती हैं। हिंदू धर्म में बरगद का वृक्ष पूजनीय है, और इसके पूजन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा की जाती है।
पूजन विधि और सामग्री
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष के पास जाकर धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा करती हैं। वे रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं और हाथ जोड़कर उसकी परिक्रमा करती हैं, जिससे उनके पतियों के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान और पितरों की पूजा का विशेष महत्व है। महिलाएं बांस की टोकरी में सप्त धान्य के ऊपर ब्रह्मा और वट सावित्री की मूर्तियां स्थापित करके वट के पास जाकर पूजन करती हैं। इस दिन यम का भी पूजन किया जाता है और वट की परिक्रमा करते समय 108 बार वट वृक्ष में कलावा लपेटा जाता है।
शुभ योग और तिथियां
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास के अनुसार, 16 मई को शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन विशेष फलदायी हो गया है। शनि अमावस्या पर व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग भी बन रहे हैं। सौभाग्य योग 15 मई को दोपहर 2:21 बजे से 16 मई को सुबह 10:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद शोभन योग शुरू होगा। इन योगों को शुभ कार्यों और पूजा के लिए लाभकारी माना जाता है।
पूजन सामग्री
वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री में सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां, धूप, दीप, घी, बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग का सामान, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, बरगद का फल और जल से भरा कलश शामिल करना चाहिए।
सावित्री की कथा
सावित्री, राजर्षि अश्वपति की एकमात्र संतान थीं, जिन्होंने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पति के रूप में चुना। जब नारद जी ने बताया कि सत्यवान की आयु कम है, तब भी सावित्री ने अपने निर्णय को नहीं बदला। सत्यवान के महाप्रयाण के दिन, जब यमराज उनके प्राण लेने आए, तब सावित्री ने यमराज से प्रार्थना की। यमराज ने उन्हें तीन वरदान देने का प्रस्ताव दिया, और सावित्री ने अपने पति की आयु बढ़ाने का वरदान मांगा। अंततः यमराज ने उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़ दिया।
