वट सावित्री व्रत: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लाने में सफलता प्राप्त की थी। इस लेख में, हम आपको वट सावित्री व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में जानकारी देंगे। जानें कैसे इस दिन वट वृक्ष की पूजा करके महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
| May 15, 2026, 14:36 IST
वट सावित्री व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लाने में सफलता प्राप्त की थी। हालाँकि, इस बार महिलाओं के बीच वट सावित्री व्रत की तिथि को लेकर कुछ भ्रम उत्पन्न हो गया है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि 15 या 16 मई को वट सावित्री व्रत कब मनाया जाएगा, साथ ही व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में भी जानकारी देंगे।
तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, 16 मई को सुबह 05:11 बजे ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का आरंभ होगा। यह तिथि 17 मई की रात 01:30 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करके अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
शुभ मुहूर्त
जानकारी के अनुसार, 16 मई 2026 की सुबह पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:07 से 04:48 बजे तक रहेगा। इसके बाद, दोपहर 02:04 से 03:28 बजे तक विजय मुहूर्त होगा। शाम को 07:04 से 07:25 बजे तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा। इस समय के दौरान, आप वटवृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं।
पूजन विधि
सुबह स्नान के बाद, महिलाएं नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। पूजा की थाली में रोली, धूप, दीप, अक्षत, फल, कच्चा सूत और भीगे हुए चने रखें। इसके बाद, सत्यवान और सावित्री की कथा सुनाई जाती है। पूजा के अंत में, बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत को पूरा किया जाता है। इस दिन आटे के गुलगुले और विभिन्न पकवान बनाने की परंपरा है।
महत्व
धार्मिक ग्रंथों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना गया है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव तीनों देवताओं का वास होता है। महिलाएं बरगद की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर सूत का धागा लपेटा जाता है, और वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
