सकट चौथ 2026: तिथि, पूजा विधि और महत्व
सकट चौथ, जो हर साल माघ माह की चतुर्थी को मनाया जाता है, इस बार 06 जनवरी 2026 को है। यह व्रत संतानों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। जानें इस व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।
| Jan 6, 2026, 09:12 IST
सकट चौथ का महत्व
हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह हर साल माघ महीने की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष, सकट चौथ का व्रत 06 जनवरी 2026 को होगा। इसे तिलकुट चतुर्थी, तिलकुट चौथ और संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत संतानों को संकटों और विपत्तियों से बचाने के लिए किया जाता है, और इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं सकट चौथ की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, 06 जनवरी 2026 को सुबह 08:01 बजे माघ कृष्ण चतुर्थी की शुरुआत होगी। यह तिथि 07 जनवरी की सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, इस दिन व्रत किया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:15 से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा।
पूजन विधि
सकट चौथ के दिन, सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर हाथ में अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें। इन अक्षत और पुष्पों को भगवान गणेश पर चढ़ाएं। पूजा स्थल पर तिल और गुड़ के लड्डू, धूप, चंदन, शकरकंद, मौसमी फल और एक तांबे का कलश जल के साथ रखें। पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और मुख्य पूजा शाम को की जाती है। इसलिए शाम को पुनः स्नान करें और भगवान के सामने दीपक जलाएं।
इसके बाद देवी-देवताओं को तिलक करें और जल अर्पित करें, फिर भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद सकट चौथ की कथा सुनें। कथा सुनने के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें भोग अर्पित करें। रात में चंद्र देव को अर्घ्य देकर भोग लगाएं और पूजा के बाद अपना व्रत खोलें।
महत्व
यह व्रत संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सभी संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है। यह भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूजा के दौरान तिल का पहाड़ बनाती हैं, जिसे जीवन की बाधाओं का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय चांदी के सिक्के से तिल के ढेर को बीच से काटकर संतान के मंगल और उज्जवल भविष्य की कामना की जाती है। इस दिन चंद्र देव के दर्शन और पूजन से मानसिक कष्ट भी दूर होते हैं।
