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सकट चौथ: जानें इस विशेष दिन का महत्व और पूजा विधि

सकट चौथ, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। जानें इस दिन के धार्मिक महत्व, भद्रा का प्रभाव, पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन का समय। यह जानकारी आपको इस विशेष दिन को सही तरीके से मनाने में मदद करेगी।
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सकट चौथ: जानें इस विशेष दिन का महत्व और पूजा विधि

सकट चौथ का महत्व


नई दिल्ली: आज मंगलवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार के कष्ट दूर होते हैं। विशेष रूप से माताएं इस दिन अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं।


सकट चौथ का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय तिथि मानी जाती है। सकट चौथ के दिन गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं।


भद्रा का प्रभाव

पंचांग के अनुसार, आज 6 जनवरी को सुबह 7:15 से 8:03 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। इस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। चंद्रमा कर्क राशि में होने के कारण भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर भी महसूस किया जाएगा। इसके अलावा, दोपहर 3:03 से 4:21 बजे तक राहुकाल रहेगा, इस समय पूजा से बचना उचित है।


सकट चौथ पूजा के शुभ मुहूर्त

आज सकट चौथ पर पूजा के लिए कई शुभ समय उपलब्ध हैं। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:48 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। विजय मुहूर्त 2:11 से 2:53 बजे तक है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 5:36 से 6:04 बजे तक रहेगा, जो दीपदान और संध्या पूजा के लिए उपयुक्त है। सायाह्न संध्या 5:39 से 7:01 बजे तक मानी गई है।


अमृत काल सुबह 10:46 से 12:17 बजे तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 12 बजे से 12:54 बजे तक (7 जनवरी) रहेगा, जो विशेष पूजा के लिए महत्वपूर्ण है। आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह 7:15 से 12:17 बजे तक बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।


चंद्र दर्शन का समय

सकट चौथ व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। आज चंद्रमा रात 8:54 बजे दिखाई देगा। इसी समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। माना जाता है कि चंद्र दर्शन के बिना यह व्रत पूर्ण नहीं होता।