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सतुवाई अमावस्या 2026: सत्तू का महत्व और धार्मिक मान्यताएँ

सतुवाई अमावस्या 2026, जो 17 अप्रैल को मनाई जाएगी, इस दिन सत्तू का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सत्तू का दान और सेवन करना शुभ माना जाता है। जानें इस दिन के महत्व, सत्तू के स्वास्थ्य लाभ और इसे कैसे सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।
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सतुवाई अमावस्या 2026: सत्तू का महत्व और धार्मिक मान्यताएँ

सतुवाई अमावस्या का महत्व

सतुवाई अमावस्या 2026: धार्मिक परंपराओं के अनुसार, वैशाख माह की अमावस्या को सतुवाई अमावस्या कहा जाता है। इस दिन सत्तू का विशेष महत्व होता है, और इसे दान करना या सेवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह तिथि 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।


सतुवाई अमावस्या का नाम 'सतुआ' से लिया गया है, जिसका अर्थ भुने हुए चनों या जौ से बने सत्तू से है। गर्मियों में यह सत्तू शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है, और इसे पचाना भी आसान होता है।


इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करें। इससे पुण्य फल प्राप्त होता है। स्नान के बाद सूर्य को जल में तिल डालकर अर्पित करना चाहिए। इस दिन पितरों के लिए तर्पण भी करना चाहिए।


सुपरफूड सतुआ:
सत्तू एक पारंपरिक भारतीय सुपरफूड है, जो भुने हुए चनों को पीसकर बनाया जाता है। यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन, और कैल्शियम का समृद्ध स्रोत है, जो गर्मियों में शरीर को ऊर्जा, ठंडक और हाइड्रेशन प्रदान करता है। यह पाचन में सुधार, वजन घटाने, और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।


प्राकृतिक कूलेंट: सत्तू की तासीर ठंडी होती है, जो गर्मियों में पेट को ठंडा रखती है और लू से बचाती है।