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हिंदू नववर्ष: विशेषता और महत्व

हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है, जो इस साल 19 मार्च को है। यह दिन न केवल नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी। जानें इस नववर्ष की विशेषताएँ, ग्रह-नक्षत्र की स्थिति और इस साल का पूर्वानुमान।
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हिंदू नववर्ष: विशेषता और महत्व

नए पंचांग और ग्रह-नक्षत्र की जानकारी


Hindu Nav Varsh, नई दिल्ली: चैत्र मास की शुरुआत हो चुकी है, और इसी के साथ हिंदू नववर्ष का आगाज़ होता है। हर वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नववर्ष की शुरुआत होती है। इस साल हिंदू नववर्ष 19 मार्च, गुरुवार को आरंभ होगा, जो विक्रम संवत 2083 के रूप में जाना जाएगा।


इस दिन से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है, और यह दिन महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत को क्यों खास माना जाता है और नए पंचांग तथा ग्रह-नक्षत्र के बारे में जानकारी प्राप्त करें।


हिंदू नववर्ष का महत्व

हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है। पौराणिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक कारणों से यह नववर्ष विशेष माना जाता है। नववर्ष का आरंभ व्रतों और त्योहारों के साथ होता है, जिसमें चैत्र नवरात्रि प्रमुख है। इस माह में ठंड का अंत होता है और गर्मी का आगाज़ होता है, इसलिए इस समय संतुलन बनाए रखने के लिए सात्विक आहार और व्रतों पर जोर दिया जाता है।


पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू नववर्ष के दिन, यानी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसलिए इस माह को सृजन और नव आरंभ का प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु ने भी इसी माह में मत्स्य अवतार लिया था। यह मान्यता भी है कि इसी तिथि से सतयुग का आरंभ हुआ था। सम्राट विक्रमादित्य ने भी इसी दिन से नए संवत्सर की गणना शुरू की, जिसके कारण इसे विक्रम संवत कहा जाता है।


राजा और मंत्री का निर्धारण

हिंदू नववर्ष में राजा और मंत्री का निर्धारण उस वार के आधार पर होता है, जिस दिन नया संवत शुरू होता है। 19 मार्च को नववर्ष का आरंभ गुरुवार को हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष का राजा गुरु ग्रह होगा, जबकि मंत्री पद मंगल ग्रह को प्राप्त होगा।


इस साल का पूर्वानुमान

इस बार नववर्ष की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हो रही है। इस समय शुक्ल योग के साथ मीन लग्न रहेगा। विक्रम संवत 2083 का नाम 'रौद्र' है, जिसका अर्थ तीव्र या उग्र प्रवृत्ति से जुड़ा है। शास्त्रों में वर्णित है कि रौद्र संवत्सर में वर्षा सामान्य से कम हो सकती है, जिसका प्रभाव कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। इस वर्ष अग्नि संबंधी घटनाएं, प्राकृतिक आपदाएं और राजनीतिक अस्थिरता जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।