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AI के जरिए सेल्फी से फिंगरप्रिंट चोरी का खतरा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हैकर्स अब AI का उपयोग करके आपकी सेल्फी से फिंगरप्रिंट चुरा सकते हैं। यह खतरा केवल प्राइवेसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहचान की चोरी और वित्तीय नुकसान भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते समय अधिक सतर्क रहना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AI-आधारित हैकिंग में वृद्धि हो रही है, जिससे साइबर हमले और भी खतरनाक हो गए हैं।
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AI के जरिए सेल्फी से फिंगरप्रिंट चोरी का खतरा

नई दिल्ली में साइबर सुरक्षा की चेतावनी


नई दिल्ली: साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हैकर्स अब AI का उपयोग करके आपकी सेल्फी से फिंगरप्रिंट चुरा सकते हैं। यह खतरा केवल आपकी प्राइवेसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहचान की चोरी और वित्तीय नुकसान भी हो सकता है।


आजकल लोग सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें साझा करना आम बात समझते हैं। सेल्फी लेते समय 'पीस साइन' या 'विक्ट्री साइन' दिखाना एक सामान्य प्रथा है, लेकिन यह आदत अब आपके लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।


साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ली चांग ने हाल ही में एक चीनी टेलीविजन शो में दिखाया कि कैसे AI और फोटो-एडिटिंग टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट निकाले जा सकते हैं। उन्होंने एक सेलिब्रिटी की सेल्फी का उपयोग करते हुए यह साबित किया कि कैमरे में स्पष्ट रूप से दिखने वाली उंगलियों से फिंगरप्रिंट का काफी डेटा प्राप्त किया जा सकता है।


डेटा चोरी की दूरी

ली चांग के अनुसार, यदि किसी तस्वीर में उंगलियों के सिरे सीधे कैमरे की ओर हों और तस्वीर लगभग 1.5 मीटर की दूरी से ली गई हो, तो फिंगरप्रिंट स्पष्ट रूप से निकाले जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 1.5 से 3 मीटर की दूरी से ली गई तस्वीरों में भी फिंगरप्रिंट का लगभग आधा डेटा निकाला जा सकता है। AI टूल्स और फोटो-एन्हांसमेंट तकनीकों की मदद से धुंधले प्रिंट को भी साफ किया जा सकता है।


इस तकनीक का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि पासवर्ड को बदला जा सकता है, बायोमेट्रिक डेटा जैसे फिंगरप्रिंट और चेहरे की बनावट स्थायी होते हैं। यदि यह डेटा गलत हाथों में चला जाता है, तो इससे पहचान की चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी और अन्य गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ली चांग ने चेतावनी दी है कि लोगों को सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते समय अधिक सतर्क रहना चाहिए।


रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AI-आधारित हैकिंग में वृद्धि हो रही है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया से जुड़े कई साइबर समूह अपने हमलों को और अधिक खतरनाक बनाने के लिए AI मॉडलों का उपयोग कर रहे हैं।


रिपोर्ट में अन्य जानकारी

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि Gemini, Claude और OpenAI जैसे उन्नत AI टूल्स का उपयोग करके हैकर्स अब अधिक परिष्कृत मैलवेयर बना रहे हैं और बड़े पैमाने पर साइबर हमले कर रहे हैं। Google के मुख्य विश्लेषक, John Hultquist ने कहा कि AI ने साइबर हमलों की गति, क्षमता और गंभीरता को काफी बढ़ा दिया है।


इस बीच, AI कंपनी Anthropic ने हाल ही में अपने नए AI मॉडल, Mythos को सार्वजनिक रूप से जारी न करने का निर्णय लिया है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक इतनी शक्तिशाली है कि यदि यह गलत हाथों में पड़ गई, तो यह सरकारों, वित्तीय प्रणालियों और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।