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VitalID: नई तकनीक जो आपके दिल की धड़कन से करेगी लॉग इन

VitalID एक नई तकनीक है जो दिल की धड़कन और सांस की कंपनों का उपयोग करके लॉग इन प्रक्रिया को सरल बनाती है। यह तकनीक विशेष रूप से एक्सटेंडेड रियलिटी हेडसेट्स के लिए विकसित की गई है और बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के पहचानने की क्षमता रखती है। शोधकर्ताओं ने इसके परीक्षण में 95% से अधिक सटीकता से सही उपयोगकर्ताओं की पहचान की है। जानें कि यह तकनीक भविष्य में कैसे उपयोगी साबित हो सकती है और इसकी विशेषताएँ क्या हैं।
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VitalID: नई तकनीक जो आपके दिल की धड़कन से करेगी लॉग इन

लॉग इन की प्रक्रिया में क्रांति


नई दिल्ली: आजकल ऐप्स और वेबसाइट्स पर लॉग इन करना एक सामान्य आवश्यकता बन गई है, लेकिन विभिन्न पासवर्ड याद रखना या बार-बार फिंगरप्रिंट और फेस आईडी का उपयोग करना थकाऊ हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इस समस्या का एक अनोखा समाधान प्रस्तुत किया है, जिसे VitalID कहा जाता है। यह तकनीक आपके शरीर की स्वाभाविक हलचलों, जैसे दिल की धड़कन और सांस लेने से उत्पन्न होने वाली कंपनों का उपयोग करके लॉग इन करने की प्रक्रिया को सरल बनाती है।


लॉग इन का तरीका पूरी तरह से बदलने वाला है

VitalID आपको पासवर्ड टाइप करने, चेहरे की स्कैनिंग या फिंगरप्रिंट देने की आवश्यकता के बिना पहचानता है। यह विशेष रूप से एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) हेडसेट्स के लिए विकसित की गई है। इस पर रटगर्स यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टेम्पल यूनिवर्सिटी और टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर काम किया है।


VitalID कैसे काम करता है?

जब हम सांस लेते हैं या दिल धड़कता है, तो इससे गर्दन और खोपड़ी में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। हर व्यक्ति की हड्डियों की संरचना और चेहरे के ऊतकों का आकार भिन्न होता है, जिससे ये कंपन भी अद्वितीय होते हैं। हेडसेट में लगे मोशन सेंसर्स इन कंपनों को पकड़कर उपयोगकर्ता की पहचान करते हैं।


इसके लिए किसी नए हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं है; केवल सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत है। रटगर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर यिंगयिंग चेन का कहना है कि यदि XR डिवाइस हमारी दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं, तो लॉग इन प्रक्रिया को भी सरल, निरंतर और सुरक्षित होना चाहिए।


सिस्टम की परीक्षण सफलता

शोधकर्ताओं ने 10 महीनों तक 52 व्यक्तियों पर दो लोकप्रिय XR हेडसेट्स का उपयोग करके परीक्षण किया। परिणाम उत्साहजनक रहे, सही उपयोगकर्ता को 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में सही पहचाना गया, जबकि अनधिकृत व्यक्तियों को 98 प्रतिशत से अधिक मामलों में रोका गया।


टीम ने एक विशेष फिल्टरिंग सिस्टम भी विकसित किया है, जो सिर हिलाने या चलने-फिरने जैसी बड़ी हलचलों को अलग करता है, और केवल सांस और दिल की हल्की कंपनों पर ध्यान केंद्रित करता है। किसी की सांस की नकल करना संभव हो सकता है, लेकिन खोपड़ी से गुजरने वाली कंपनों की सटीक नकल करना बहुत कठिन है, जिससे धोखाधड़ी का खतरा कम हो जाता है।


VitalID का भविष्य

XR हेडसेट्स में अब बैंकिंग, व्यक्तिगत जानकारी या संवेदनशील डेटा तक पहुंच आसान हो रही है। ऐसे में हाथ से टाइप करना या 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन करना मुश्किल हो सकता है। VitalID बैकग्राउंड में चुपचाप काम करता है, बिना उपयोगकर्ता को कोई इनपुट देने की आवश्यकता के।


यह तकनीक अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है, लेकिन लाइसेंसिंग के लिए तैयार है और इसका प्रोविजनल पेटेंट भी फाइल किया जा चुका है। इसे 2025 में ACM कॉन्फ्रेंस ऑन कंप्यूटर एंड कम्युनिकेशंस सिक्योरिटी में पेश किया गया था।