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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: नौकरी के अवसरों पर प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर उद्योग विशेषज्ञों की राय में बदलाव आ रहा है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि उनके पूर्वानुमान सही नहीं निकले। NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग ने AI को नौकरी कटौती का कारण बताने से इनकार किया और इसे नई संभावनाओं का स्रोत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि AI और मानव सहयोग से भविष्य में कार्य करने के तरीके में बदलाव आएगा। जानें इस विषय पर और क्या कहते हैं विशेषज्ञ।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: नौकरी के अवसरों पर प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

AI के प्रति बदलती धारणाएं


नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रति पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर कई उम्मीदें और चिंताएं उभरी हैं। कई तकनीकी कंपनियों और उद्योग के विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाया था कि AI लाखों नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। इस सोच के चलते कई बड़ी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की। लेकिन अब AI के प्रति कई प्रमुख उद्योग नेताओं के विचार बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं।


AI का नौकरी पर प्रभाव

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर AI के प्रभाव के बारे में जो पूर्वानुमान लगाए थे, वे पूरी तरह से सही नहीं निकले। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि कई कार्यालयी नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न रही है।


पिछले दो वर्षों में बदलाव


पिछले दो वर्षों में मेटा, अमेजन, गूगल और अन्य प्रमुख कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की। कई मामलों में, कंपनियों ने इसे तकनीकी बदलाव और AI आधारित कार्यप्रणाली से जोड़ा। इससे कर्मचारियों में यह डर बढ़ा कि AI भविष्य में रोजगार के अवसरों को कम कर सकता है।


हालांकि, अब कंपनियों को AI को बड़े पैमाने पर लागू करने की वास्तविक लागत का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े AI मॉडल को संचालित करने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता, महंगे ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU), विशाल डेटा सेंटर और निरंतर बिजली की आवश्यकता होती है। इन संसाधनों पर होने वाला खर्च कई बार अपेक्षा से अधिक साबित हो रहा है।


NVIDIA के CEO की राय

जेन्सेन हुआंग का दृष्टिकोण


इस बीच, NVIDIA के CEO जेन्सेन हुआंग ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि AI को नौकरी कटौती का कारण बताना उचित नहीं है। उनके अनुसार, AI नई संभावनाएं और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य उत्पादकता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या को कम करना।


AI की एक बड़ी चुनौती इसकी सटीकता है। कई बार AI सिस्टम गलत या काल्पनिक जानकारी प्रस्तुत कर देते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में हैलुसिनेशन कहा जाता है। यही कारण है कि कानूनी, वित्तीय, स्वास्थ्य और व्यावसायिक क्षेत्रों में AI के आउटपुट की जांच के लिए अभी भी अनुभवी मानव विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।


विशेषज्ञों की राय

AI और मानव सहयोग


विशेषज्ञों का मानना है कि AI निश्चित रूप से कार्य करने के तरीके को बदल रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से इंसानों का विकल्प नहीं बन पाया है। वर्तमान परिस्थितियां संकेत देती हैं कि भविष्य में AI और इंसान साथ मिलकर काम करेंगे, जहां तकनीक उत्पादकता बढ़ाएगी और मानव अनुभव, निर्णय क्षमता तथा रचनात्मकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।