इजरायल-लेबनान युद्धविराम: मैक्रों की चिंता और नागरिकों की वापसी
युद्धविराम की शुरुआत
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम गुरुवार से प्रभावी हो गया है। हालांकि, इस समझौते के लागू होते ही इसके भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इसे एक नाजुक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।
मैक्रों की चिंता
मैक्रों की चेतावनी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस युद्धविराम के भविष्य को लेकर अपनी चिंताओं का इजहार किया है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर तनाव के कारण यह समझौता पहले से ही कमजोर नजर आ रहा है। फिर भी, उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
उल्लंघन के आरोप
उल्लंघन के आरोप: लेबनान की सेना ने आरोप लगाया है कि इजरायली बलों ने दक्षिण लेबनान के कुछ सीमावर्ती गांवों में गोलीबारी करके समझौते का उल्लंघन किया है। दूसरी ओर, इजराइल का कहना है कि वे केवल संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।
नागरिकों की वापसी
नागरिकों की वापसी: जैसे ही युद्धविराम लागू हुआ, दक्षिण लेबनान से विस्थापित हजारों लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। बेरुत और सिदोन जैसे शहरों में जश्न का माहौल भी देखने को मिला।
ईरान का रुख
ईरान का रुख: ईरान ने भी इस युद्धविराम का स्वागत किया है। इसे क्षेत्र में एक बड़े शांति समझौते की दिशा में उठाया गया पहला कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई बड़ी डील हो सकती है।
