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ईरान-इजराइल संघर्ष में GPS जैमिंग की भूमिका

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में GPS जैमिंग तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह तकनीक सैटेलाइट से आने वाले सिग्नल को बाधित करती है, जिससे ड्रोन और मिसाइल सही दिशा में नहीं जा पाते। इसके प्रभाव केवल युद्ध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। जानें कैसे यह तकनीक युद्ध के मैदान में और सामान्य जीवन में बदलाव ला रही है।
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ईरान-इजराइल संघर्ष में GPS जैमिंग की भूमिका

नई दिल्ली में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने एक गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस संघर्ष के दौरान एक नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक, जिसे जीपीएस जैमिंग कहा जाता है, चर्चा का विषय बन गई है। यह तकनीक सैटेलाइट से आने वाले लोकेशन सिग्नल को बाधित करती है, जिससे ड्रोन, मिसाइल, जहाज और विमानों को सही दिशा में जाने में कठिनाई होती है।


GPS जैमिंग क्या है?

जीपीएस सिग्नल बहुत कमजोर होते हैं, जो सैटेलाइट से पृथ्वी तक पहुंचते हैं। जैमर एक उपकरण है, जो इन सिग्नल्स से अधिक शक्तिशाली रेडियो तरंगें भेजता है, जिससे असली जीपीएस सिग्नल कमजोर हो जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि मोबाइल, ड्रोन या मिसाइल को सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिलती और वे गलत दिशा में बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, स्पूफिंग तकनीक का भी उपयोग किया जाता है, जिसमें नकली लोकेशन दिखाकर सिग्नल को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है। यह दुश्मन के हमलों को विफल करने में सहायक होता है।


युद्ध में GPS जैमिंग का उपयोग

युद्ध के दौरान GPS जैमिंग का सबसे बड़ा प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर देखा जा रहा है, जहां से विश्व का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान के युद्ध की शुरुआत के बाद, एक दिन में 1,100 से अधिक जहाजों का GPS और AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) प्रभावित हुआ है। जहाजों को गलत स्थान दिखाए जा रहे हैं, जिससे शिपिंग कंपनियों में चिंता बढ़ गई है। कई टैंकर अपनी गति कम कर रहे हैं, मार्ग बदल रहे हैं या रुक रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। इसके अलावा, एयरक्राफ्ट्स को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


सामान्य लोगों पर प्रभाव

GPS जैमिंग का प्रभाव केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। आम जनता की दैनिक जिंदगी भी इससे प्रभावित हो रही है। मोबाइल फोन में गलत लोकेशन दिखाई दे रही है, कैब सेवाएं जैसे उबर या स्थानीय ऐप्स ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, और मैप्स में गड़बड़ी हो रही है। ईरान में राइड-हेलिंग और डिलीवरी सेवाएं महीनों से परेशान हैं।