ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद इजराइल की जासूसी रणनीतियों का खुलासा
नई दिल्ली में हालात की गंभीरता
नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मृत्यु के बाद मध्य पूर्व में स्थिति और भी बिगड़ गई है। इस संदर्भ में एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इजराइल की जासूसी एजेंसियों के एक लंबे समय से चल रहे योजना का विवरण दिया गया है। इस योजना के तहत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला और ईरान की सेना के उच्च अधिकारियों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इजराइल ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक करने की प्रक्रिया को कैसे अंजाम दिया।
इजराइल की जासूसी तकनीक
इजराइल ने खामेनेई और उनकी सुरक्षा टीम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक करने में काफी प्रयास किए। खामेनेई के मोबाइल फोन नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त करने में इजराइल ने कई साल लगाए। सभी ट्रैफिक कैमरे वर्षों से हैक किए गए थे, और खामेनेई की आवाजाही की रिकॉर्डिंग को एन्क्रिप्ट करके सर्वर पर भेजा गया। इस हैकिंग ने इजराइली और अमेरिकी सेनाओं को खामेनेई की स्थिति का पता लगाने में मदद की, जिससे एक लक्षित हमले में उन्हें मार गिराया गया।
सिक्योरिटी कैमरों का नियंत्रण
कैसे होते हैं कैमरे नियंत्रित:
आजकल शहरों में स्थापित सीसीटीवी कैमरे केवल ट्रैफिक नियंत्रण के लिए नहीं होते। यदि कोई सिस्टम में घुसपैठ कर ले, तो ये निगरानी के उपकरण बन जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज सीधे बाहरी सर्वर पर अपलोड की जाती थी, जिसका अर्थ है कि यह डेटा आपके शहर में नहीं, बल्कि देश से बाहर भेजा जाता है। मोबाइल नेटवर्क में घुसपैठ से फोन की लोकेशन ट्रैक की जाती है, जिससे सुरक्षा गतिविधियों की स्पष्टता बढ़ जाती है। इजराइल ने इस जानकारी का उपयोग करके एक सटीक कार्य योजना बनाई।
ऑपरेशन की प्रक्रिया
कैसे चला ऑपरेशन:
यह कार्य कुछ महीनों का नहीं, बल्कि कई वर्षों का था। इजराइल की खुफिया इकाई 8200 और मोसाद ने टेक्नोलॉजी सिस्टम में घुसपैठ की। हर कैमरे के लाइव फीड को एक्सेस किया गया और इन्हें मोबाइल से जोड़ा गया। खामेनेई के बॉडीगार्डों की स्थिति, सुरक्षा स्टाफ की गतिविधियाँ, और गार्डों के बदलाव की जानकारी इकट्ठा की गई। इससे खामेनेई की दैनिक आदतों का एक डिजिटल मानचित्र तैयार किया गया।
कैमरों का उपयोग
कैसे बनते हैं कैमरे हथियार:
आजकल सड़क या घरों में लगे सीसीटीवी कैमरे सामान्य प्रतीत होते हैं। इन्हें लोगों पर नजर रखने के लिए स्थापित किया जाता है। लेकिन यदि इनमें कोई घुसपैठ कर ले, तो ये कैमरे निगरानी के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। इसके साथ ही मोबाइल नेटवर्क में भी घुसपैठ की जाती है, जिससे लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। इससे सुरक्षा गतिविधियों की स्पष्टता बढ़ जाती है।
