कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आईसीएआर में सुधार का सख्त आदेश
कृषि अनुसंधान में सुधार की आवश्यकता
नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की उच्चस्तरीय बैठक में संस्थानों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आईसीएआर की संस्थाएं कृषि प्रगति की धुरी हैं, इसलिए इनकी कार्यप्रणाली में उत्कृष्टता और परिणाम अनिवार्य हैं।
बैठक की शुरुआत में, चौहान ने पुणे स्थित आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान के हालिया निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वहां के अधिकारियों को संस्थान की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। निरीक्षण के दौरान उन्हें नर्सरी में घास उगी हुई मिली और अधिकारियों ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिए।
कृषि मंत्री ने डीडीजी (बागवानी) डॉ. एस.के. सिंह से भी सवाल किए और कहा कि ऐसी अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संस्थान सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, तो यह राष्ट्रीय हानि है।
चौहान ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों की वास्तविक जरूरतों का समाधान करना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संस्थागत निगरानी को और प्रभावी बनाना आवश्यक है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आईसीएआर की सभी संस्थाओं के लिए प्रदर्शन मानक तय किए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को पुरस्कृत किया जाएगा, जबकि जो मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कृषि मंत्री ने सभी संस्थानों की रिव्यू बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए और कहा कि सुधारात्मक एजेंडा 16 जुलाई तक आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीएआर जैसी संस्थाएं भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
