खाने को अखबार या एल्युमिनियम फॉयल में लपेटने के स्वास्थ्य जोखिम
खाने की आदतें और स्वास्थ्य पर प्रभाव
नई दिल्ली - हमारे दैनिक जीवन में कई ऐसी आदतें होती हैं, जिन्हें हम बिना सोचे-समझे अपनाते हैं। विशेष रूप से रसोई से जुड़ी आदतें अक्सर पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही हैं, जैसे रोटी को अखबार में लपेटना। समय के साथ, अखबार की जगह एल्युमिनियम फॉयल ने ले ली है, लेकिन ये दोनों ही विकल्प हमारी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
अखबार में खाना रखना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अखबार छापने में उपयोग की जाने वाली स्याही में कई हानिकारक रसायन होते हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, जब ये रसायन गरम या तैलीय खाद्य पदार्थों के संपर्क में आते हैं, तो ये खाने में मिल जाते हैं। इस प्रकार, ये हानिकारक तत्व हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जो दीर्घकालिक में पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
सड़क पर मिलने वाले फास्ट फूड जैसे पकौड़े, जलेबी या समोसे अक्सर अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं। जब हम बार-बार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो शरीर में विषैले तत्वों का जमा होना संभव है। हालांकि इसका प्रभाव तुरंत नहीं दिखता, लेकिन यह आदत लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
अब एल्युमिनियम फॉयल की बात करें, तो इसे आमतौर पर अखबार से बेहतर माना जाता है, लेकिन यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि जब गरम, खट्टा या मसालेदार खाना फॉयल में रखा जाता है, तो उसमें से थोड़ी मात्रा में एल्युमिनियम खाने में मिल जाती है। हालांकि यह मात्रा कम होती है, लेकिन यदि इसे नियमित रूप से किया जाए, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे शरीर पर पड़ सकता है।
गर्मी के कारण फॉयल में मौजूद कण खाने में आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए फॉयल का उपयोग कभी-कभार करना ठीक है, लेकिन इसे रोजाना की आदत बनाना उचित नहीं है। इन जोखिमों से बचने के लिए अन्य सुरक्षित विकल्पों को अपनाना आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि खाने को सुरक्षित रखने के लिए स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग करना बेहतर होता है। इसके अलावा, साफ सूती कपड़ा या फूड-ग्रेड पेपर भी अच्छे विकल्प माने जाते हैं।
