अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होंगे भारतीय उद्योग, जानें कौन से सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

ट्रंप का नया टैरिफ, भारतीय व्यापार पर पड़ेगा असर
ट्रंप ने लगाया है 50 फीसदी टैरिफ, पड़ेगा भारतीय व्यापार पर बुरा असर
Business News Update, बिजनेस डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण नाराजगी जताते हुए 27 अगस्त से अतिरिक्त टैरिफ शुल्क लागू किया है। इससे पहले 7 अगस्त को भी ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इस प्रकार, अमेरिका भारत की उन सभी कंपनियों से 50 प्रतिशत टैरिफ वसूल करेगा जो अमेरिका को सामान का निर्यात करती हैं। इस लेख में हम उन उद्योगों के बारे में चर्चा करेंगे जो ट्रंप के इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
इन उद्योगों पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का ज्वेलरी, टेक्सटाइल, ऑटो और सी फूड सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं होता या टैरिफ में कमी नहीं आती, तो 48.2 अरब डॉलर के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। यह प्रभाव केवल कंपनियों के मुनाफे पर नहीं, बल्कि रिपोर्ट के अनुसार भारत से अमेरिका को सबसे अधिक ज्वेलरी, कपड़े, मशीनरी और रसायन का निर्यात किया जाता है।
50% टैरिफ के कारण अमेरिका में ये उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे वहां से ऑर्डर में कमी आएगी। ऑर्डर में कमी के चलते कंपनियों को उत्पादन घटाना पड़ सकता है, जिससे छंटनी की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि किस सेक्टर में कितनी नौकरियां जाएंगी।
फार्मा सेक्टर की चुनौतियाँ
अमेरिका ने भारतीय फार्मा सेक्टर को टैरिफ से अभी तक मुक्त रखा है, और मौजूदा टैरिफ 0% है। लेकिन ट्रंप ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। जब तक यह लागू नहीं होता, तब तक छूट जारी रहेगी।
भारत सरकार के उपाय
भारत सरकार को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप, रूस और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति तैयार की है। इसके तहत भारत अब चीन, मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजारों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसके साथ ही, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ भारत ने व्यापार समझौता किया है, जो 1 अक्टूबर से लागू होगा। ब्रिटेन के साथ समझौता अगले साल अप्रैल से लागू हो सकता है। ओमान, चिली, पेरू, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत जारी है।