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भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: 4.22 लाख करोड़ का नुकसान

अमेरिका द्वारा लगाए गए नए 50 प्रतिशत टैरिफ से भारत के निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियों को लगभग 4.22 लाख करोड़ रुपये के निर्यात में कमी का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए नई व्यापारिक रणनीतियाँ तैयार की हैं, जिसमें अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: 4.22 लाख करोड़ का नुकसान

अमेरिका के नए टैरिफ से निर्यात में बदलाव


अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों में वृद्धि से भारत के निर्यात पर असर


बिजनेस डेस्क : हाल के दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक चुनौती अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ दरों से मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले 31 जुलाई और फिर 6 अगस्त को भारत पर 25-25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।


अब भारतीय कंपनियों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जा रहा है, जो भारत के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है, जो पिछले दो दिनों में 1550 अंक से अधिक टूट चुका है। हालांकि, केंद्र सरकार इस टैरिफ से बचने के लिए प्रयासरत है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।


अमेरिकी बाजार में भारत के निर्यात का महत्व

भारत विश्व स्तर पर कुल 38 लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात करता है, जिसमें से 20 प्रतिशत अमेरिका में बेचे जाते हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद लगभग 4.22 लाख करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित होगा। सरकार को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप, रूस और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाने के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति तैयार की है। इसके तहत भारत अब चीन, मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजारों पर ध्यान केंद्रित करेगा।


भारत की नई व्यापारिक पहल

भारत ने आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ ट्रेड डील की है, जो 1 अक्टूबर से लागू होगी। ब्रिटेन के साथ डील अगले साल अप्रैल में लागू होने की संभावना है। ओमान, चिली, पेरू, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत जारी है। भारत सीफूड के लिए रूस, यूरोपीय संघ, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वहीं, हीरे और आभूषण के लिए वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों की ओर बढ़ रहा है।


रूस का भारतीय कंपनियों को आमंत्रण

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत-रूस व्यापार मुद्दे को बड़ा बनाने के विरोध में, रूस ने हाल ही में भारतीय कंपनियों को कहा है कि यदि अमेरिका अपने बाजार को भारतीय सामान के लिए बंद कर सकता है, तो रूसी बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खुला रहेगा। अब यह देखना होगा कि भारत इस स्थिति का सामना करने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।