भारत के लिए रूसी तेल पर छूट समाप्त होने की संभावना, नई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं
रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी नीति में बदलाव
नई दिल्ली: भारत के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने में आने वाले समय में नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट (सैंक्शंस वेवर) को लंबे समय तक बनाए रखने के पक्ष में नहीं है और इसे जल्द समाप्त करने की योजना बना रहा है।
अमेरिकी सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी की सुनवाई के दौरान रुबियो ने कहा कि रूसी तेल पर प्रतिबंध अमेरिकी नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मौजूदा छूट केवल एक अस्थायी उपाय है। उन्होंने कहा, “हम इस छूट को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहते हैं। इसे वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए लागू किया गया था।”
वर्तमान छूट 17 जून को समाप्त होने वाली है। यह पहली बार मार्च में लागू की गई थी और बाद में दो बार बढ़ाई गई। यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए अमेरिका ने यह कदम उठाया था। भारत इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारी छूट पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। इससे देश को कम कीमत पर ऊर्जा मिली और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी राहत मिली।
रुबियो ने स्वीकार किया कि इस छूट का लाभ केवल भारत को ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों को भी मिला है। उनके अनुसार, रूसी तेल की आपूर्ति ने वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, अमेरिका का यह तर्क है कि रूस के तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इसी कारण वाशिंगटन चाहता है कि भारत समेत अन्य बड़े आयातक देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करें।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। अमेरिका का आरोप था कि भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को आर्थिक सहायता पहुंचा रहा है। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के तहत इस अतिरिक्त टैरिफ को वापस लेने का निर्णय लिया गया।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका भविष्य में प्रतिबंधों को लेकर नरम रुख अपनाता है, तो भारत को फिर से सस्ते रूसी तेल का लाभ मिल सकता है। वहीं, यदि छूट समाप्त होती है, तो भारत को वेनेजुएला, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात बढ़ाने की रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
