मोहन भागवत का पंजाब दौरा: तीन बच्चों की आवश्यकता और नशे की समस्या पर विचार
पंजाब में संघ प्रमुख का दौरा
जालंधर - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इस समय पंजाब के दौरे पर हैं, जो संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, उन्होंने विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
तीन बच्चों की आवश्यकता
“देशहित में तीन बच्चे जरूरी”
भागवत ने जनसंख्या संरचना के बदलाव पर चर्चा करते हुए कहा कि संतुलित जनसंख्या के लिए परिवार में तीन बच्चों का होना आवश्यक है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ समुदायों में जन्म दर में कमी आ रही है, जबकि अन्य में यह बढ़ रही है, जो दीर्घकालिक संतुलन के लिए चिंता का विषय है।
नशे की समस्या पर चिंता
पंजाब में नशे की समस्या
संघ प्रमुख ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं के नशे या आत्महत्या की प्रवृत्ति के पीछे अकेलापन एक बड़ा कारण है। भागवत ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय दें और उनकी भावनात्मक समस्याओं को समझें। उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार और समाज की मजबूत भागीदारी से युवाओं को नशे से दूर रखा जा सकता है।
विवाह की आयु पर विचार
विवाह की आदर्श आयु
संघ प्रमुख ने विवाह की आदर्श आयु पर भी अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने कहा कि 19 से 25 वर्ष के बीच विवाह करने से पारिवारिक स्थिरता और सामाजिक समन्वय में सुधार हो सकता है।
हिंदू जीवन पद्धति
“हिंदू जीवन पद्धति है”
धर्म से जुड़े सवालों पर भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संकीर्ण धार्मिक पहचान नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने बताया कि सिख, जैन और बौद्ध परंपराएं अपनी मान्यताओं के साथ स्वतंत्र रूप से विकसित हुई हैं और आपसी सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।
संघ से जुड़ने का आह्वान
संघ को जानने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में भागवत ने कहा कि लोग संघ को समझने के लिए शाखाओं में आएं, प्रकल्पों से जुड़ें या समाज सेवा के कार्यों में भाग लें। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करना संघ की मूल भावना को समझने का सबसे सरल तरीका है।
