Candida auris: जानलेवा फंगस का बढ़ता खतरा
Candida auris का परिचय
नई दिल्ली - Candida auris (C. auris) एक ऐसा फंगस है जो दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है और इसे पहली बार 2009 में जापान में पहचाना गया था। अब यह 60 से अधिक देशों में फैल चुका है। अमेरिका में इसके लगभग 7,000 मामले 27 राज्यों में दर्ज किए गए हैं। CDC ने इसे 'Urgent Antimicrobial Threat' के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसका अर्थ है कि इसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। यह पहला फंगल पैथोजन है जिसे इस श्रेणी में रखा गया है।
C. auris का प्रभाव
C. auris मानव त्वचा और अस्पतालों की सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यह विशेष रूप से ICU में भर्ती मरीजों, वेंटिलेटर पर रहने वाले व्यक्तियों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए खतरा बन सकता है। कई सामान्य एंटीफंगल दवाएं इस पर प्रभावी नहीं होतीं, जिससे इसका इलाज करना कठिन हो जाता है और संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी और संभावनाएं
Hackensack Meridian Center for Discovery and Innovation की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नई पीढ़ी की एंटीफंगल दवाओं, बेहतर डायग्नोस्टिक टेस्ट और वैक्सीन-आधारित उपचार की आवश्यकता है। हाल की अनुसंधान में यह भी सामने आया है कि C. auris आयरन चुराने के लिए विशेष जीन सक्रिय करता है। इस प्रक्रिया को रोकने से इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली वाले देशों में यह फंगस और भी गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है। बेहतर निगरानी, सतर्कता और समय पर उपचार ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। Candida auris कोई काल्पनिक खतरा नहीं है, बल्कि यह अस्पतालों में एक खामोश कातिल के रूप में मौजूद है। सही समय पर कदम उठाने और अनुसंधान से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, अन्यथा यह जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकता है।
