NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: छात्रों की चिंता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
छात्रों की चिंता का नया दौर
नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े पेपर लीक के कारण NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया है, जिससे 22 लाख से अधिक छात्र गहरे तनाव और चिंता में हैं। 3 मई को आयोजित इस परीक्षा के संदर्भ में आरोप लगे थे कि परीक्षा से पहले एक गेस पेपर लीक हो गया था।
सूत्रों के अनुसार, लीक हुए पेपर में केमिस्ट्री के लगभग 120 प्रश्न और बायोलॉजी के कई प्रश्न शामिल थे, जो असली परीक्षा के प्रश्न पत्र से मेल खाते थे। परीक्षा रद्द होने से छात्रों और उनके परिवारों में निराशा का माहौल है। कई छात्रों ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था और इस परीक्षा की तैयारी में वर्षों बिताए थे। अब, परीक्षा रद्द होने से वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित और भयभीत हैं।
विशेषज्ञों की राय
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि परीक्षा का रद्द होना उनकी मेहनत की असफलता नहीं है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में छात्रों का गुस्सा, निराशा, नींद में परेशानी, मानसिक थकान और भविष्य को लेकर डर महसूस करना सामान्य है।
छात्रों के लिए सलाह
छात्रों को क्या सलाह दी गई है?
विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपनी भावनाओं को छिपाने के बजाय साझा करें। माता-पिता, भाई-बहन, दोस्तों, शिक्षकों या काउंसलर से बात करने से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक भावनाओं को दबाने से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें और चर्चाएं भी छात्रों की चिंता को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि छात्रों को केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर निर्भर रहना चाहिए और सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से समय नहीं बिताना चाहिए।
दिनचर्या बनाए रखने के सुझाव
छात्रों को अपनी दिनचर्या कैसे बनाए रखनी चाहिए?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि छात्रों को अपनी दिनचर्या को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें हल्की-फुल्की पढ़ाई जारी रखनी चाहिए, समय पर सोना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए, टहलना चाहिए, योग करना चाहिए और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए। इससे मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों ने माता-पिता से भी अनुरोध किया है कि वे अपने बच्चों पर अतिरिक्त दबाव न डालें। इस समय छात्रों को भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता है, न कि डांट-फटकार या दूसरों से तुलना की।
अंत में, यदि कोई छात्र लगातार घबराहट, पैनिक अटैक या गंभीर मानसिक परेशानी का अनुभव करता है, तो उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेनी चाहिए।
