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RBI के नए नियम: मोबाइल वॉलेट्स पर सख्ती और फिनटेक उद्योग पर प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे फिनटेक उद्योग में हलचल मच गई है। नए नियमों के तहत मोबाइल वॉलेट्स के लिए मासिक बैलेंस, फंड ट्रांसफर और कैश लोडिंग की सीमाएं निर्धारित की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पाबंदियाँ डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन की गति को प्रभावित कर सकती हैं। जानें इस विषय में और क्या है खास।
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RBI के नए नियम: मोबाइल वॉलेट्स पर सख्ती और फिनटेक उद्योग पर प्रभाव

RBI द्वारा नए दिशा-निर्देशों की घोषणा

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें आमतौर पर 'मोबाइल वॉलेट' के नाम से जाना जाता है। इस कदम ने फिनटेक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। अब, कंपनियों जैसे मोबिक्विक, फोनपे, अमेजन पे, पाइन लैब्स और एयरटेल पेमेंट्स बैंक को नए और कड़े नियमों का पालन करना होगा।


नए नियमों की मुख्य बातें

मासिक बैलेंस की सीमा: किसी भी मोबाइल वॉलेट में मासिक बकाया 2 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता।


फंड ट्रांसफर पर ब्रेक: पर्सन-टू-पर्सन (P2P) फंड ट्रांसफर की सीमा अब 25 हजार रुपये कर दी गई है।


कैश लोडिंग लिमिट: हर महीने वॉलेट में नकद जमा करने की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है।


क्या UPI को मिलेगा लाभ?

पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (PCC) जैसे प्रतिष्ठित थिंक टैंक ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है। 20 मई को आयोजित गोलमेज बैठक में फिनटेक कंपनियों, पूर्व बैंकर्स और सलाहकारों ने भाग लिया। सभी विशेषज्ञों ने माना कि इन पाबंदियों से मोबाइल वॉलेट्स को कमजोर करके बैंकिंग प्रणाली और UPI को प्राथमिकता दी जा रही है।


RBI की सख्ती के कारण

- सट्टेबाजी, गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग कंपनियां डिजिटल वॉलेट का दुरुपयोग कर रही हैं।


- कई मर्चेंट अवैध रूप से ट्रांजेक्शन कर रहे हैं।


- FIU ने असामान्य गतिविधियों और भारी ट्रांजेक्शन के कारण कई खातों को बंद कर दिया।


कंपनियों की मांग

- कंपनियों का कहना है कि कुछ लोगों के कारण पूरी इंडस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।


- कंपनियों ने फुल-केवाईसी और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग सिस्टम विकसित करने में भारी निवेश किया है। एक उद्योग अधिकारी के अनुसार, हालिया प्रतिबंधों ने डिजिटल वॉलेट कारोबार की लाभ कमाने की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।


ग्राहकों और उद्योग पर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, नए नियमों का सीधा असर ग्राहकों और फिनटेक उद्योग पर पड़ेगा। जबकि RBI वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध लेनदेन को रोकने का प्रयास कर रहा है, कंपनियों को चिंता है कि इससे डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन की गति धीमी हो जाएगी।