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SIBO: पेट की समस्याओं का नया खतरा और इसके प्रभाव

SIBO, या छोटी आंत में बैक्टीरिया की असामान्य वृद्धि, पेट की समस्याओं का एक नया खतरा है। यह गैस, सूजन और मानसिक थकान का कारण बन सकता है। जानें इसके लक्षण, जोखिम और उपचार के तरीके। सही जानकारी और समय पर पहचान से इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
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SIBO: पेट की समस्याओं का नया खतरा और इसके प्रभाव

SIBO क्या है?


नई दिल्ली: वर्तमान में पेट से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें से एक है SIBO। कई लोग गैस, पेट फूलने और कमजोरी को हल्के में लेते हैं, जबकि इसके पीछे गंभीर कारण हो सकते हैं।


SIBO की प्रकृति और कारण

SIBO एक ऐसी स्थिति है जिसमें छोटी आंत में बैक्टीरिया की संख्या असामान्य रूप से बढ़ जाती है। सामान्यतः बैक्टीरिया बड़ी आंत में होते हैं, लेकिन जब ये छोटी आंत में पहुंच जाते हैं, तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। यह समस्या कमजोर पाचन, सर्जरी के बाद या लंबे समय तक दवाओं के सेवन के कारण उत्पन्न हो सकती है।


ब्लोटिंग और सूजन का कारण

SIBO में बैक्टीरिया भोजन को सही तरीके से पचने नहीं देते, जिससे गैस का निर्माण अधिक होता है और पेट फूलने लगता है। कई लोग खाने के तुरंत बाद भारीपन और सूजन का अनुभव करते हैं, जिससे वे असहज महसूस करते हैं।


ब्रेन फॉग से संबंध

SIBO का प्रभाव मस्तिष्क पर भी पड़ता है, जिसे ब्रेन फॉग कहा जाता है। इसमें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, भूलने की आदत और मानसिक थकान शामिल होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आंतों में उत्पन्न होने वाले टॉक्सिन्स रक्त के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचकर यह स्थिति उत्पन्न करते हैं।


जोखिम में लोग

जो लोग पहले से पाचन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए SIBO का खतरा अधिक होता है। डायबिटीज, थायरॉयड, कमजोर इम्यून सिस्टम या बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने वाले व्यक्तियों में इसकी संभावना बढ़ जाती है। उम्र बढ़ने के साथ भी इसका खतरा बढ़ता है।


पहचान और उपचार का महत्व

SIBO की समय पर पहचान करना आवश्यक है, जिससे उपचार सरल हो जाता है। डॉक्टर आमतौर पर सांस की जांच और लक्षणों के आधार पर इसका निदान करते हैं। उचित आहार, दवाएं और जीवनशैली में बदलाव से ब्लोटिंग, सूजन और ब्रेन फॉग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।