ईरान की चाय संस्कृति: दूध रहित चाय का अनोखा स्वाद
ईरान की समृद्ध चाय परंपरा
ईरान केवल अपने तेल और गैस के भंडार के लिए नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, वास्तुकला, परंपराओं और मेहमाननवाजी के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां के पारंपरिक व्यंजन भी विशेष माने जाते हैं। यदि आप भारत में बनाई जाने वाली ईरानी चाय के स्वाद से परिचित हैं, जिसमें अक्सर दूध मिलाया जाता है, तो आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ईरान में चाय का एक अलग ही रूप है, जिसमें दूध का उपयोग नहीं किया जाता।
ईरान में ब्लैक टी का महत्व
भारत में अधिकांश लोग चाय में दूध मिलाकर पीना पसंद करते हैं, जबकि ईरान में पारंपरिक रूप से केवल ब्लैक टी का सेवन किया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि दूध डालने से चाय का असली स्वाद, रंग और सुगंध प्रभावित होती है। ईरानी लोग चाय को उसकी शुद्धता में पीना पसंद करते हैं ताकि वे इसके स्वाद और सुगंध का पूरा आनंद ले सकें।
इसके अलावा, ईरानी संस्कृति में चाय के साथ नमकीन स्नैक्स के बजाय मीठे खाद्य पदार्थ जैसे खजूर का सेवन किया जाता है। दूध वाली चाय और मीठे स्नैक्स का स्वाद मेल नहीं खाता, इसलिए लोग चाय में दूध डालने से परहेज करते हैं।
विशेष अवसरों पर केसर चाय
ईरान में लोग रोजमर्रा की जिंदगी में सामान्य ब्लैक टी का सेवन करते हैं, जिसे केवल चाय पत्ती और कभी-कभी दालचीनी या इलायची के साथ बनाया जाता है। खास अवसरों पर, जैसे पारिवारिक समारोह या शादियों में, जाफरान चाय या केसर चाय बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए केसर के धागों को पीसकर उसमें चीनी या नमक मिलाया जाता है, फिर इसे गर्म पानी में घोलकर उबलती चाय में डाला जाता है। सर्विंग के समय स्वादानुसार चीनी मिलाई जा सकती है।
गोल गवज़बान फूलों की चाय
ईरान में गोल गवज़बान फूलों की चाय भी बहुत लोकप्रिय है। इसमें शहद या चीनी मिलाकर मिठास बढ़ाई जा सकती है और नींबू डालकर इसे ताजगी प्रदान की जाती है। लोग इसे अक्सर शाम के समय पीना पसंद करते हैं। इस प्रकार, ईरानी चाय संस्कृति अपने अनोखे स्वाद और परंपरा के कारण भारत से काफी भिन्न है। यहां की चाय में दूध न डालने की परंपरा और मीठे स्नैक्स के साथ इसका मेल इसे विशेष बनाता है।
