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कोरोनावायरस का नया वेरिएंट 'सिकाडा': जानें इसके बारे में सब कुछ

कोरोनावायरस का नया वेरिएंट BA.3.2, जिसे 'सिकाडा' नाम दिया गया है, तेजी से फैल रहा है। यह वेरिएंट ओमिक्रॉन की एक पुरानी वंशावली से संबंधित है और वैज्ञानिक इसके म्यूटेशन को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि यह पिछले वेरिएंट्स की तुलना में अधिक खतरनाक नहीं है। जानें इसके बारे में और क्या हमें चिंता करनी चाहिए।
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कोरोनावायरस का नया वेरिएंट 'सिकाडा': जानें इसके बारे में सब कुछ

कोरोनावायरस की नई चुनौती


कोरोनावायरस एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में, COVID-19 का एक नया वेरिएंट, जिसे BA.3.2 नाम दिया गया है, सामने आया है। वैज्ञानिक इसे आमतौर पर 'सिकाडा' (Cicada) के नाम से जानते हैं। आइए इस नए वेरिएंट के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें:


सिकाडा नामकरण का कारण

इस नए वेरिएंट का संबंध ओमिक्रॉन (BA.3) की एक पुरानी वंशावली से है, जो 2022 की शुरुआत में लगभग समाप्त हो गई थी। हालांकि, एक लंबे समय के बाद, यह वेरिएंट अचानक फिर से प्रकट हुआ है। इसे 'सिकाडा' नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह उस कीड़े की तरह है जो वर्षों तक जमीन के नीचे छिपा रहता है और फिर अचानक बाहर आता है।


नए वेरिएंट की उत्पत्ति

यह वेरिएंट सबसे पहले 2024 के अंत में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था, लेकिन अब यह अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में तेजी से फैल रहा है।


सिकाडा वेरिएंट की चिंताएँ

वैज्ञानिक इस नए वायरस के प्रति सतर्क हैं क्योंकि इसमें कई म्यूटेशन (बदलाव) हुए हैं। विशेष रूप से, इसकी बाहरी संरचना, यानी स्पाइक प्रोटीन में इसके पिछले रूपों की तुलना में 50 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं, और मूल 'वुहान वायरस' की तुलना में 70 से अधिक म्यूटेशन हुए हैं।


इसलिए, यह वेरिएंट तीन मुख्य कारणों से चिंता का विषय बना हुआ है:


1. इम्यूनिटी से बचना: यह हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम से बचने या वैक्सीन के सुरक्षात्मक प्रभावों को चकमा देने में सक्षम है।


2. तेजी से फैलना: यह पिछले वेरिएंट्स की तुलना में अधिक तेजी से फैलने की क्षमता रखता है।


3. नया व्यवहार: वायरस के कार्य करने के तरीके में कुछ नए जैविक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


क्या हमें चिंता करनी चाहिए?

फिलहाल, घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि हालांकि यह तेजी से फैल सकता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह दर्शाता हो कि यह पिछले ओमिक्रॉन वेरिएंट्स की तुलना में अधिक खतरनाक या जानलेवा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे दिसंबर 2025 में "निगरानी के तहत वेरिएंट" (VUM) घोषित किया है।