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कोलकाता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अवैध संबंध से जन्मे बच्चों को पेंशन का अधिकार

कोलकाता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अवैध संबंध से जन्मे बच्चों को पेंशन का अधिकार होगा। यह मामला एक गेटमैन से जुड़ा है, जिसने अपनी पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी की। अदालत ने पहली पत्नी को कानूनी रूप से हकदार माना और दूसरी शादी से जन्मी संतान के अधिकार को भी मान्यता दी। इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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कोलकाता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अवैध संबंध से जन्मे बच्चों को पेंशन का अधिकार

कोलकाता हाई कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

कोलकाता: कोलकाता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के अवैध संबंध से संतान होती है, तो उसे पेंशन का अधिकार मिलेगा। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला पूर्वी रेलवे के एक गेटमैन से संबंधित है, जिसने अपनी पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली थी। रिटायरमेंट के बाद, उसने अपनी सर्विस और पेंशन बुक में पहली पत्नी और बेटे का नाम हटाकर दूसरी पत्नी और उनकी 15 वर्षीय बेटी का नाम दर्ज करवा लिया।

इस पर पहली पत्नी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका तलाक कभी हुआ ही नहीं, इसलिए उनका नाम हटाना गलत है। उन्होंने बताया कि वह मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त हैं, जिसके कारण पति ने उन्हें छोड़ दिया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि 2012 के बाद से उन्हें कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला और उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया।

जब मामला अदालत में पहुंचा, तो न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने सुनवाई के दौरान कहा कि तलाक के कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, इसलिए पहली पत्नी ही कानूनी रूप से हकदार हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी भले ही वैध न हो, लेकिन उससे जन्मी संतान के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि पहली पत्नी और दूसरी शादी से जन्मी बेटी—दोनों के नाम पेंशन और सर्विस रिकॉर्ड में शामिल किए जाएं। इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे अवैध संबंधों से जन्मे बच्चों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से मान्यता मिली है।