कोलोरेक्टल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह
नई दिल्ली: मार्च का महीना विश्वभर में कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, राजीव गांधी कैंसर संस्थान के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक साहनी ने लोगों से बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर के प्रति जागरूक रहने और नियमित जांच कराने की अपील की है।
कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण
डॉ. साहनी ने बताया, "कोलोरेक्टल कैंसर एक चुपके से हमला करने वाला रोग है। इसके प्रारंभिक चरण में लक्षण सामान्य होते हैं, जिससे लोग इसे अनदेखा कर देते हैं।" उन्होंने कहा कि समय पर जांच से इस बीमारी का सफल उपचार संभव है।
कम उम्र में बढ़ते मामले
डॉ. साहनी के अनुसार, पहले यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब 40 वर्ष से कम उम्र के मरीज भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनियमित खानपान, कम फाइबर वाला आहार, प्रोसेस्ड फूड, धूम्रपान, शराब और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं।
लक्षणों पर ध्यान दें
मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून आना, लगातार पेट दर्द या सूजन, बिना कारण वजन घटना, और लंबे समय तक थकान जैसे लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है। डॉ. साहनी ने सलाह दी कि यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत गैस्ट्रो या कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करें।
कोलोस्टोमी की आवश्यकता
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोलोरेक्टल कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाए, तो पहले कीमोथेरेपी के बाद सर्जरी में बड़ी आंत या मलाशय का हिस्सा हटाना पड़ सकता है। डॉ. साहनी ने बताया कि कुछ मरीजों को कोलोस्टोमी करनी पड़ती है, जिसमें पेट की दीवार पर एक स्टोमा बनाकर मल को एक विशेष बैग में एकत्रित किया जाता है।
स्क्रीनिंग का महत्व
डॉ. साहनी ने 45 वर्ष की उम्र के बाद नियमित कोलोनोस्कोपी कराने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास है, उन्हें और भी सतर्क रहना चाहिए। स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले ही पॉलीप्स को हटाया जा सकता है।
जागरूकता का महत्व
कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर, विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाने की सलाह दी है। डॉ. साहनी ने कहा, "यह महीना हमें याद दिलाता है कि समय पर जांच और सही जानकारी से हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं।"
