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क्या आप भी महसूस करते हैं करंट जैसा झटका? जानें इसके कारण और उपाय

क्या आप भी ऑफिस या घर में मेटैलिक चीजों को छूने पर करंट जैसा झटका महसूस करते हैं? लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल स्थैतिक करंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण हो सकते हैं। जानें इसके संभावित कारण, जैसे विटामिन की कमी और डिजिटल वर्क कल्चर, और विशेषज्ञों की सलाह पर कैसे इस समस्या से निपटा जा सकता है।
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क्या आप भी महसूस करते हैं करंट जैसा झटका? जानें इसके कारण और उपाय

करंट जैसा झटका: समस्या और समाधान


कई लोग ऑफिस या घर में काम करते समय अचानक मेटैलिक वस्तुओं को छूने पर हल्का करंट जैसा अनुभव कर रहे हैं। लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हाल ही में ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो इस समस्या के समाधान के लिए न्यूरोलॉजी ओपीडी में पहुंच रहे हैं।



विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल सामान्य स्थैतिक करंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करना, नींद की कमी, तनाव और मानसिक थकान जैसी स्थितियां इस संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं।


न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में यह समस्या नसों की संवेदनशीलता से संबंधित हो सकती है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, गलत जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इससे व्यक्ति को हल्के झटके या असामान्य संवेदनाएं अधिक महसूस हो सकती हैं।


डॉक्टरों ने बताया कि कुछ मरीजों में विटामिन की कमी, विशेषकर विटामिन बी12 और अन्य न्यूरो-सम्बंधित पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या का कारण बन सकती है। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह न्यूरोलॉजिकल कारणों से भी जुड़ा हो सकता है, जिसके लिए विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है।


विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल का बढ़ता डिजिटल वर्क कल्चर भी इस समस्या को बढ़ाने में योगदान दे सकता है। लगातार कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संपर्क में रहने से मानसिक थकान बढ़ती है और शरीर की संवेदनशीलता पर भी असर पड़ सकता है।


डॉक्टरों ने सलाह दी है कि यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ से परामर्श लें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है।