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क्या लिफ्टों की सुरक्षा अब खतरे में है? मोटापे के बढ़ते मामलों पर नई रिसर्च का खुलासा

हाल ही में एक अध्ययन ने लिफ्टों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाई हैं, खासकर मोटापे के बढ़ते मामलों के संदर्भ में। रिसर्च में बताया गया है कि कई पुरानी लिफ्टें आज के लोगों के बढ़ते वजन के अनुसार सुरक्षित नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भी मोटापे की दर तेजी से बढ़ रही है। क्या पुरानी लिफ्टों की क्षमता और सुरक्षा की जांच आवश्यक है? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर पूरी जानकारी।
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क्या लिफ्टों की सुरक्षा अब खतरे में है? मोटापे के बढ़ते मामलों पर नई रिसर्च का खुलासा

लिफ्टों की क्षमता पर नई चिंताएँ


नई दिल्ली: 'यह लिफ्ट 16 लोगों के लिए है' - यह चेतावनी हम सभी ने लिफ्ट में देखी होगी। लेकिन क्या यह सच में सुरक्षित है? हाल ही में ब्रिटेन और यूरोप में एक अध्ययन ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। शोध में कहा गया है कि कई पुरानी लिफ्टें आज के बढ़ते वजन और बदलते शारीरिक आकार के अनुसार सुरक्षित नहीं हैं।


तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित यूरोपीय कांग्रेस ऑन ओबेसिटी (ECO) में इस अध्ययन को प्रस्तुत किया गया। रिसर्च में बताया गया कि मोटापे की समस्या के बावजूद लिफ्टों की तकनीक में आवश्यक सुधार नहीं किए गए हैं। इस कारण, पुराने डिजाइन वाली लिफ्टें अब जोखिम का कारण बन सकती हैं। इस अध्ययन का नेतृत्व प्रोफेसर निक फाइनर ने किया, जिन्होंने 1972 से 2024 के बीच यूरोप के विभिन्न देशों में निर्मित 112 लिफ्टों का विश्लेषण किया।


पुरानी लिफ्टों की मानक समस्या

पुराने मानकों पर बनी हैं कई लिफ्टें


शोध में वैज्ञानिकों ने लिफ्टों पर लिखी वजन सीमा और यात्रियों की संख्या का अध्ययन किया। इसके बाद, इन आंकड़ों की तुलना उस समय के औसत वजन से की गई जब ये लिफ्टें बनाई गई थीं। 1970 के दशक में ब्रिटेन में पुरुषों का औसत वजन लगभग 75 किलो था, जबकि अब यह बढ़कर 86 किलो हो गया है। महिलाओं का औसत वजन भी इसी तरह बढ़ा है, लेकिन कई पुरानी लिफ्टों की क्षमता में कोई बदलाव नहीं आया है।


लिफ्ट डिजाइन में हुई बड़ी गलती

लिफ्ट डिजाइन में हुई बड़ी गलती


प्रोफेसर निक फाइनर ने बताया कि लिफ्ट डिजाइन करने वाली कंपनियों ने वजन के बजाय यात्रियों के लिए जगह पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने यह मान लिया कि लोग कम जगह में समा जाएंगे, लेकिन मोटापे के बढ़ते स्तर को सही तरीके से नहीं समझा गया। अब लोगों के शरीर का आकार और वजन दोनों बढ़ गए हैं, जिससे उन्हें लिफ्ट में अधिक जगह की आवश्यकता होती है। यदि डिजाइन पुराने मानकों पर आधारित रहे, तो इससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है।


भारत में मोटापे की समस्या

भारत में भी बढ़ रही मोटापे की समस्या


विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत में भी मोटापे की दर तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोटापे की दर 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। दक्षिण भारत में मोटापे का प्रतिशत सबसे अधिक है, जबकि पूर्वी भारत में यह कम है। ऐसे में भारत में भी पुरानी लिफ्टों की सुरक्षा की जांच आवश्यक है।


रिसर्च में यह भी कहा गया है कि यदि लिफ्टें वास्तविक जरूरतों के अनुसार डिजाइन नहीं की गईं, तो मोटापे से प्रभावित लोगों के साथ भेदभाव बढ़ सकता है। कई बार वजन सीमा पूरी होने पर कुछ लोगों को लिफ्ट से बाहर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। प्रोफेसर फाइनर ने कहा कि समाज को अब सार्वजनिक सुविधाओं को नए दौर की जरूरतों के अनुसार तैयार करना होगा।