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गर्मियों में छाछ के सेवन के लाभ और सही तरीके

गर्मियों में छाछ का सेवन न केवल ताजगी प्रदान करता है, बल्कि यह आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे वात, पित्त और कफ प्रवृत्तियों के अनुसार छाछ का सेवन करना चाहिए। सही अनुपात में छाछ का सेवन करने से न केवल पाचन में सुधार होता है, बल्कि यह शरीर को संतुलित भी रखता है। जानें छाछ के सेवन के विभिन्न तरीके और इसके स्वास्थ्य लाभ।
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गर्मियों में छाछ के सेवन के लाभ और सही तरीके

गर्मियों में छाछ का महत्व

नई दिल्ली: जैसे ही गर्मियों का मौसम आता है, लोग ठंडे पेय पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं। इस समय, छाछ का सेवन न केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि यह एक स्वादिष्ट पेय भी है। आयुर्वेद के अनुसार, छाछ केवल एक पेय नहीं है, बल्कि यह पाचन को संतुलित करने और त्रिदोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक है।


आयुर्वेद में छाछ का महत्व

आयुर्वेद में छाछ को अत्यधिक लाभकारी माना गया है। यदि इसे सही समय और अनुपात में लिया जाए, तो यह शरीर के लिए औषधि का काम कर सकती है। शरीर के दोषों को समझकर छाछ का सेवन करने से यह पेट, अग्नि और संपूर्ण शरीर को संतुलित रखती है।


वात प्रवृत्ति के लिए छाछ का सेवन

यदि किसी की प्रवृत्ति वात है, तो उन्हें ठंडी छाछ के साथ एक चुटकी सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए। इससे पेट की समस्याएं कम होती हैं और पाचन सही रहता है। कुछ लोगों को छाछ पीने के तुरंत बाद शौच जाने की आवश्यकता होती है, ऐसे में काले नमक या सेंधा नमक के साथ सेवन करने से पाचन अग्नि दुरुस्त रहती है।


पित्त प्रवृत्ति के लिए छाछ का सेवन

पित्त प्रवृत्ति वाले लोगों के लिए छाछ को मिश्री के साथ लेना फायदेमंद होता है। यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और पेट की जलन तथा एसिडिटी को कम करता है।


कफ प्रवृत्ति के लिए छाछ का सेवन

कफ प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों को छाछ में एक चुटकी सोंठ मिलाकर पीना चाहिए। इससे गले की खराश और नाक बंद होने की समस्या नहीं होती है, और पाचन अग्नि भी सही रहती है। आयुर्वेद में यह स्पष्ट किया गया है कि छाछ या कोई भी पेय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होता। इसलिए, हमेशा अपने शरीर की प्रकृति को समझकर ही खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन करें।