गर्मी में दही और छाछ: सेहत के लिए कौन सा बेहतर?
गर्मी में खान-पान की आदतें
चंडीगढ़, 12 मई। मई की तेज धूप और तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाने के कारण खान-पान की आदतों में बदलाव आ गया है। हरियाणा और उत्तर भारत में गर्मियों का मतलब दही और छाछ से भरी थाली होती है। ये दोनों दूध से बनी चीजें सेहत के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन जब गर्मी की लहर से निपटने की बात आती है, तो छाछ को दही पर प्राथमिकता मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दही एक संपूर्ण आहार है, जबकि छाछ एक उत्कृष्ट 'डिटॉक्स ड्रिंक' के रूप में कार्य करती है।
दही: ऊर्जा और प्रोबायोटिक्स का स्रोत
दही में प्रोटीन, विटामिन B12 और पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है। यह पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाकर इम्यूनिटी को मजबूत करता है। दोपहर के भोजन में दही-चावल या लस्सी का सेवन न केवल पेट को भरता है, बल्कि शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान भी बनाए रखता है। हालांकि, दही की तासीर थोड़ी भारी होती है, इसलिए आयुर्वेद इसे रात में खाने से मना करता है। यदि हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता है, तो दही एक बेहतरीन विकल्प है।
छाछ: डिहाइड्रेशन और एसिडिटी का समाधान
छाछ को भारतीय रसोई का सबसे प्रभावी 'नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट' माना जाता है। दही को मथकर और उसमें पानी मिलाकर बनाई गई छाछ शरीर को तुरंत ठंडा करती है। इसमें काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाने से यह पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद होती है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से निकलने वाले नमक की भरपाई करने के लिए छाछ सबसे अच्छा विकल्प है। इसकी कम कैलोरी इसे वजन घटाने वालों के लिए भी आदर्श बनाती है।
आयुर्वेद और विशेषज्ञों की सलाह
आयुर्वेद में छाछ को 'तक्र' कहा जाता है और इसे उन लोगों के लिए सर्वोत्तम माना गया है जिनका पाचन कमजोर है या जिन्हें अक्सर एसिडिटी की समस्या होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप भारी भोजन कर रहे हैं, तो उसके बाद एक गिलास छाछ पाचन को आसान बना देती है। वहीं, सुबह के नाश्ते या लंच के साथ दही का सेवन पोषण के लिहाज से बेहतर है। निष्कर्ष यह है कि गर्मियों में हाइड्रेटेड रहने के लिए 'छाछ' अधिक प्रभावी है, जबकि पोषण के लिए 'दही' श्रेष्ठ है।
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