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गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा: जानें लक्षण और बचाव के उपाय

गर्मी का मौसम अब पहले जैसा सामान्य नहीं रह गया है, बल्कि यह हर साल नए और चिंताजनक रिकॉर्ड बना रहा है। हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, और लोग अक्सर इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता, तब हीट स्ट्रोक का हमला होता है। इस लेख में हम हीट स्ट्रोक के लक्षण, इसके जानलेवा होने के कारण और इससे बचने के उपायों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे आप और आपके आसपास के लोग इस खतरे से सुरक्षित रह सकते हैं।
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गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा: जानें लक्षण और बचाव के उपाय

गर्मी का मौसम: एक नई चुनौती

चंडीगढ़, 22 मई। गर्मियों का मौसम अब पहले जैसा सामान्य नहीं रह गया है, बल्कि यह हर साल नए और चिंताजनक रिकॉर्ड बना रहा है। इस तेज धूप और उमस के बीच देश में हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। लोग अक्सर शुरुआती थकान या डिहाइड्रेशन को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर अपने आंतरिक तापमान को नियंत्रित करने में असफल हो जाता है, तब हीट स्ट्रोक का हमला होता है। इस स्थिति में शरीर का तापमान कुछ ही मिनटों में जानलेवा स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे जीवन संकट में पड़ सकता है।


हीट स्ट्रोक: कब और क्यों बनता है जानलेवा

हीट स्ट्रोक को एक चिकित्सा आपात स्थिति माना जाता है, क्योंकि यह शरीर के कूलिंग सिस्टम के ठप होने से उत्पन्न होती है। सामान्य दिनों में, शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखता है, लेकिन जब बाहरी तापमान 104°F (40°C) से अधिक हो जाता है, तो पसीना आना बंद हो जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने, पानी की कमी या भारी शारीरिक गतिविधियों से यह समस्या उत्पन्न होती है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से शुगर या दिल की बीमारी से ग्रस्त लोग इसके सबसे आसान शिकार होते हैं।


45 डिग्री का हीट इंडेक्स: मौत का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है और हवा में नमी बढ़ती है, खतरा दोगुना हो जाता है। जब महसूस होने वाला तापमान (हीट इंडेक्स) 45 डिग्री या उससे अधिक हो जाता है, तो अंगों का कार्य करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच सीधे धूप में रहने से बचने की सलाह दी जाती है। लगातार कई दिनों तक ऐसी भीषण गर्मी सहन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।


शरीर के शुरुआती संकेतों को पहचानें

यह राहत की बात है कि हीट स्ट्रोक अचानक नहीं होता, बल्कि शरीर इससे पहले कई संकेत देता है। इनमें शरीर का अत्यधिक गर्म होना, असहनीय सिरदर्द, चक्कर आना, पसीना आना रुक जाना और भ्रम की स्थिति शामिल हैं। इसके अलावा, मरीज की धड़कनें तेज हो जाती हैं, सांस फूलने लगती है और गंभीर मामलों में व्यक्ति बेहोश हो सकता है। इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत सतर्क होना आवश्यक है।


हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही करें ये उपाय

यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करें। सबसे पहले, पीड़ित को धूप से हटा कर किसी छायादार स्थान या एसी के पास ले जाएं। उसके तंग कपड़ों को ढीला करें और पूरे शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें। यदि मरीज होश में है, तो उसे धीरे-धीरे पानी, नींबू पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं और तुरंत डॉक्टर या एम्बुलेंस को कॉल करें।


गर्मी के बढ़ते आंकड़े और बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहर, घटते पेड़-पौधे और प्रदूषण के कारण शहरों का तापमान सामान्य से अधिक हो गया है। यही कारण है कि अब अप्रैल और मई में ही जून जैसी गर्मी महसूस हो रही है। इस जानलेवा मौसम से बचने का एकमात्र उपाय सतर्कता है। गर्मी के इस पूरे सीजन में बिना काम धूप में निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और हर छोटी शारीरिक परेशानी को गंभीरता से लें।