गुरुग्राम में नींद की स्थिति: युवा कैसे कर रहे हैं संतुलन
गुरुग्राम: नींद की कमी का सामना
गुरुग्राम . भागदौड़ भरी जिंदगी और मोबाइल की लत ने भारतीयों की नींद को बुरी तरह प्रभावित किया है। वेकफिट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के 57.8 प्रतिशत लोग ऑफिस में काम करते समय नींद और थकान का अनुभव करते हैं। नींद के मामले में चेन्नई सबसे अनुशासित शहर के रूप में उभरा है, जबकि दिल्ली-एनसीआर और 'रेजिलिएंट स्लीपर सिटी' गुरुग्राम के युवाओं का स्लीप पैटर्न भी ध्यान आकर्षित करता है।
गुरुग्राम के युवा: संतुलन बनाए रखने में सफल
इस नींद रिपोर्ट में भारत के प्रमुख शहरों के बारे में दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। साइबर सिटी गुरुग्राम को 'रेजिलिएंट स्लीपर सिटी' का दर्जा दिया गया है। कॉर्पोरेट संस्कृति और व्यस्त शेड्यूल के बावजूद, गुरुग्राम के युवा अपनी नींद को संतुलित रखने में सफल रहे हैं। वहीं, दिल्ली के लोग देर से सोने और उठने वालों की सूची में सबसे ऊपर हैं।
मुंबई की नींद की स्थिति चिंताजनक
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की नींद की स्थिति सबसे खराब है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में 62.6 प्रतिशत लोग सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस करते हैं। इसके विपरीत, चेन्नई के लोग नींद के मामले में अनुशासन का पालन कर रहे हैं। यहां के लोग समय पर सोने और जागने की आदत को सख्ती से अपनाते हैं। बेंगलुरु में 'स्लीप पैराडॉक्स' देखने को मिलता है, जहां लोग सोते हैं लेकिन उनकी नींद अस्वस्थ रहती है।
स्क्रीन टाइम: नींद का दुश्मन
महानगरों में नींद की कमी का मुख्य कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 87.6 प्रतिशत लोग बिस्तर पर जाने से पहले अपने स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। देर रात तक सोशल मीडिया पर समय बिताना और वेब सीरीज देखना आम हो गया है, जिससे 57.8 प्रतिशत लोग ऑफिस में थकान महसूस करते हैं।
स्वास्थ्य पर प्रभाव और बचाव के उपाय
अपर्याप्त नींद का असर केवल आंखों की थकान तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से हार्ट अटैक, मोटापा, डायबिटीज और गंभीर डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी है। बेहतर नींद के लिए सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रहें, हल्का भोजन करें और नियमित समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
