Newzfatafatlogo

चीन का नया ऐप: अकेलेपन से लड़ने का अनोखा तरीका

चीन में एक नया मोबाइल ऐप 'आर यू डेड' तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जो युवाओं के बीच बढ़ते अकेलेपन और निराशा की समस्या को हल करने का प्रयास कर रहा है। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को हर दिन चेक-इन करने के लिए प्रेरित करता है, और यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके इमरजेंसी संपर्क को सूचित किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन केवल एक भावनात्मक समस्या नहीं है, बल्कि यह हृदय स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। जानें इस ऐप के पीछे का विचार और अकेलेपन के खतरों के बारे में।
 | 
चीन का नया ऐप: अकेलेपन से लड़ने का अनोखा तरीका

चीन में एक अनोखा ऐप


हाल के दिनों में, चीन में एक मोबाइल एप्लिकेशन तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है। यह ऐप विशेष रूप से देश के युवाओं में बढ़ते अकेलेपन और निराशा की समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले समाज में एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। "आर यू डेड" नामक यह ऐप उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अकेले रहते हैं। इसका सिद्धांत बहुत सरल है: उपयोगकर्ताओं को हर दिन ऐप पर चेक-इन करना होता है। यदि कोई उपयोगकर्ता लगातार कई दिनों तक चेक-इन नहीं करता है, तो ऐप अपने आप उसके इमरजेंसी संपर्क को सूचित कर देता है। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में, अकेलापन और सामाजिक अलगाव तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग इसे केवल एक भावनात्मक समस्या मानते हैं, लेकिन शोध से पता चलता है कि यह शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, विशेषकर हृदय पर।


सोशल आइसोलेशन की परिभाषा

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, सोशल आइसोलेशन का अर्थ है परिवार, दोस्तों या समाज से बहुत कम या कोई संबंध न होना। यह केवल अकेले समय बिताने से भिन्न है। असली खतरा तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक भावनात्मक और सामाजिक समर्थन नहीं मिलता। जब कोई व्यक्ति अकेला महसूस करता है, तो शरीर इसे तनावपूर्ण स्थिति के रूप में देखता है। इससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो रक्तचाप और हृदय गति को बढ़ा सकता है। धीरे-धीरे, यह सूजन और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।


अकेलापन और उसके खतरे

अकेले रहने वाले लोग अक्सर व्यायाम, सही पोषण पर ध्यान नहीं देते हैं, और यहां तक कि अपनी दवाएं लेने में भी लापरवाह हो सकते हैं। इसके अलावा, अकेलापन अवसाद और चिंता को बढ़ाता है, जो हृदय स्वास्थ्य को और नुकसान पहुंचाता है। बीमारी या कमजोरी के समय अपनों का साथ बहुत महत्वपूर्ण होता है। अकेलेपन में इस समर्थन की कमी होती है, जिससे ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।


किसे है अधिक खतरा?

अकेले रहने वाले बुजुर्ग या जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उन्हें अधिक खतरा होता है। हालांकि, युवा भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। काम का दबाव, स्थान परिवर्तन, और डिजिटल संचार पर बढ़ती निर्भरता के कारण आमने-सामने की बातचीत कम हो रही है। अच्छी बात यह है कि रिश्ते हृदय के लिए एक औषधि की तरह काम करते हैं। इन फायदों को प्राप्त करने के लिए, नियमित रूप से अपने प्रियजनों से जुड़ें, किसी सामाजिक या सामुदायिक समूह में शामिल हों, स्वयंसेवा करें, या योग और चलने जैसी सामूहिक गतिविधियों में भाग लें। आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें। अकेलापन केवल मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि हृदय स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर जोखिम कारक है। जैसे हम आहार, नींद और व्यायाम पर ध्यान देते हैं, वैसे ही अपने रिश्तों के लिए भी समय देना आवश्यक है। अच्छी बातचीत करना, साथ में भोजन करना, या समुदाय के साथ जुड़ना न केवल मन को खुश रखता है, बल्कि लंबे समय में हृदय को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।