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डायबिटीज और लिवर स्वास्थ्य: नई रिसर्च के चौंकाने वाले तथ्य

हालिया अध्ययन ने यह दर्शाया है कि डायबिटीज केवल रक्त शर्करा की समस्या नहीं है, बल्कि यह लिवर स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही है। वडोदरा के एक अस्पताल द्वारा किए गए अध्ययन में 9000 से अधिक मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का पता चला। यह अध्ययन बताता है कि बिना लक्षणों के भी लिवर की समस्याएँ बढ़ सकती हैं। जानें कैसे सही आहार और व्यायाम से इस खतरे को कम किया जा सकता है।
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डायबिटीज और लिवर स्वास्थ्य: नई रिसर्च के चौंकाने वाले तथ्य

डायबिटीज का नया पहलू

डायबिटीज अब केवल रक्त शर्करा की समस्या नहीं रह गई है। हालिया अध्ययन ने यह दर्शाया है कि इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों का लिवर भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, और अधिकांश को इसकी जानकारी नहीं होती। वडोदरा के एसएसजी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए अध्ययन में 9000 से अधिक मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें यह पाया गया कि कई मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियाँ बिना किसी लक्षण के बढ़ रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लिवर फेलियर का कारण बन सकता है.


अध्ययन के चौंकाने वाले परिणाम

स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े

द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के 26% मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस की पहचान की गई। इनमें से 14% की स्थिति गंभीर थी, जबकि 5% मरीज सिरोसिस के कगार पर थे। यह अध्ययन देश के 27 प्रमुख अस्पतालों और क्लीनिकों के डेटा पर आधारित है, जिसमें मेदांता गुरुग्राम, सर गंगा राम अस्पताल दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थान शामिल हैं.


फैटी लिवर के बिना भी खतरा

बिना फैटी लिवर वाले भी खतरे में

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लिवर की समस्याएँ केवल फैटी लिवर वाले मरीजों तक सीमित नहीं हैं। जिन मरीजों को फैटी लिवर की समस्या नहीं थी, उनमें भी 13% में फाइब्रोसिस पाया गया और 4% सिरोसिस के खतरे में थे। चिकित्सकों का कहना है कि डायबिटीज लिवर में सूजन उत्पन्न करती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह समस्या बिना लक्षण के बढ़ती रहती है.


लक्षणों का देर से आना

लक्षण आने तक काफी देर हो जाती है

अधिकतर मरीज तब तक लिवर की समस्याओं के बारे में नहीं जानते जब तक पीलिया, पेट में दर्द या थकान जैसे लक्षण प्रकट नहीं होते। तब तक लिवर काफी हद तक प्रभावित हो चुका होता है। इसलिए चिकित्सकों की सलाह है कि डायबिटीज के मरीज केवल शुगर लेवल की जांच न करें, बल्कि हर साल कम से कम एक बार फाइब्रोस्कैन या लिवर फंक्शन टेस्ट अवश्य कराएं.


बचाव के उपाय

बचाव के उपाय

चिकित्सकों का कहना है कि सही आहार, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित करके इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मोटापा और अनियंत्रित डायबिटीज लिवर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यदि आप टाइप-2 डायबिटीज के मरीज हैं, तो अपने चिकित्सक से लिवर की जांच के बारे में अवश्य चर्चा करें। समय पर जानकारी मिलने से लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है.